अमेठी सिटी। गौरीगंज के अन्नीबैजल गांव में लूट प्रकरण में बाल अपचारी को निगरानी में लेने की कार्रवाई विवादों में आ गई है। परिजनों ने गौरीगंज पुलिस पर बदसुलूकी करने, दबाव बनाने और घर में तोड़फोड़ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि शनिवार रात पुलिस टीम गांव पहुंची और बिना स्पष्ट जानकारी दिए किशोर को अपने साथ ले जाने लगी। विरोध जताने पर महिलाओं और पुरुषों की पिटाई कर बंधक बनाया गया। घर के अंदर सामान बिखेर दिया गया और कुछ वस्तुओं को नुकसान पहुंचाया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार के लोग घबराए हुए हैं।
परिजनों ने बताया कि किशोर कुछ दिन पहले ही हरिद्वार से लौटा था। उसके खिलाफ किन आरोपों में कार्रवाई हुई, इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाने के उद्देश्य से सभी सदस्यों को एक जगह बैठाए रखा और फिर किशोर को अपने साथ ले गई। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। इसमें मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। परिवार का कहना है कि जांच पूरी होने पर ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
एएसपी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि लूट में बाल अपचारी के शामिल होने पर उसे निगरानी में लेने गई पुलिस टीम के साथ परिजनों ने अभद्रता की, जिसकी सूचना अभिलेखों में अंकित की गई है। परिजन पुलिस पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।
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किशोर से पूछताछ की प्रक्रिया पर उठे सवाल
बाल अपचारी को निगरानी में लेकर पूछताछ करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में अभिभावकों की मौजूदगी आवश्यक मानी जाती है लेकिन परिजनों का आरोप है कि बिना सूचना किशोर को पुलिस लेकर चली गई। इससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।