अमेठी। पेंशनरों को इस बार जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए कोषागार कार्यालय नहीं आना होगा। वरिष्ठ कोषाधिकारी ने कोरोना के चलते इस बार वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से जीवित रहने का प्रमाण पत्र मुहैया कराने की सहूलियत दी है।
विभिन्न सरकारी नौकरियों से सेवा निवृत्त होने वाले अफसर व कर्मचारियों को जिला मुख्यालय पर स्थित जिला कोषागार से पेंशन मिलती है। पेंशनरों को प्रति वर्ष अपने जीवित रहने का प्रमाण देने के लिए स्वयं उपस्थित होना पड़ता है।
वरिष्ठ कोषाधिकारी आलोक राजवंशी ने कोरोना के चलते कोषागार से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनरों को सहूलियत देने का निर्णय लिया है। कोषाधिकारी ने जिले से पाने वाले सभी पेंशनरों से अपील की है कि उन्हें अब जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए कोषागार कार्यालय तक आने की बाध्यता नहीं होगी।
कहा है कि पेंशनर ऑनलाइन, बैंक व इंडिया पेास्ट के माध्यम से अपना जीवित होने का प्रमाण पत्र बनवाकर भेजवा सकते हैं जो पूरी तरह से मान्य होगा। कोषाधिकारी ने बताया कि यह निर्णय कोरोना के चलते लिया गया है। ज्यादातर पेंशनर वृद्ध हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें घर से बाहर व भीड़ वाले स्थानों पर ले जाना उचित नहीं होगा। जीवित प्रमाण पत्र नहीं देने की दशा में पेंशनर की पेंशन रोक दी जाती है।