अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित 40 दिवसीय गायत्री साधना के 24वें दिन शनिवार को प्रातः पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान जपकर्ता सुधीर सिंह ने कहा कि उपासना, साधना और आराधना के माध्यम से ही मनुष्य अपने भीतर की कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर शांति और स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कामना शरीर को निर्बल और मन को चंचल बनाती है, जबकि क्रोध विवेक को नष्ट कर संबंधों में दरार पैदा करता है। लोभ असंतोष को जन्म देता है और मोह सत्य को ढक देता है। वहीं अहंकार आत्मा को मलिन और ईर्ष्या मनुष्य को भीतर से कमजोर करती है। इन दुर्गुणों से मुक्ति के लिए नियमित साधना आवश्यक है।
सुधीर सिंह ने कहा कि साधना का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक उन्नति नहीं, बल्कि विचार, व्यवहार और चरित्र में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। करुणा, सद्भाव, सहयोग और सेवा जैसे सद्गुणों को जीवन में अपनाने से व्यक्तित्व पुष्प की तरह सुगंधित और दीपक की तरह आलोकित हो जाता है। इस अवसर पर अनिल पांडेय, जितेंद्र सिंह, अभिषेक गुप्ता, सुनील श्रीवास्तव, सुनीता सिंह, शकुंतला पांडेय, कविता शर्मा, सुभाष दूबे आदि साधक मौजूद रहे।