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Amethi News: रोज पांच लाख की दवा बाहर से खरीद रहे मरीज

Thu, 29 May 2025 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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अमेठी सिटी। सरकारी अस्पताल में इलाज की निशुल्क सुविधा का दावा भले ही किया जा रहा हो, लेकिन रोजाना पांच लाख से अधिक रुपये की दवाएं मरीज निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदने को मजबूर हैं। मोटे कमीशन के लालच में चिकित्सक बाहर की दवाएं लिखने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।
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जिले की 23 लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय, 200 बेड जिला अस्पताल तिलोई, 13 सीएचसी और 30 पीएचसी संचालित हैं। सरकार की ओर से मरीजों को इन अस्पतालों में निशुल्क जांच, दवा व उपचार की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इमरजेंसी व ओपीडी में आने वाले मरीज जब चिकित्सकों को दिखाते हैं तो अस्पताल के परचे पर अंदर की दवाएं तो छोटी परची पर बाहर की दवाएं लिखते हैं।

मरीज कहते हैं कि साहब... हम इलाज कराने आएं हैं, जिस दवा से आराम मिलेगा वही, लेंगे। चाहे बाहर से ही खरीदनी पड़ें। हालांकि अगर सूत्रों की मानें तो बीमारी के मुताबिक 100 से 500 रुपये तक की दवाएं मरीजों को खरीदनी पड़ती हैं। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखने पर प्रतिबंध है।
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बाहर की दवा लिखने पर दी चेतावनी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि एक चिकित्सक को बाहर से दवा लिखने पर चेतावनी दी गई है। उन्हें किसी भी हाल में बाहर की दवा लिखने से मना किया गया है। वहीं अन्य चिकित्सकों पर भी निगाह रखी जा रही है। औषधि निरीक्षक कमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि अभियान चलाकर मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई की जाती है। कहा कि जहां भी शिकायत मिलती है, उस मेडिकल स्टोर संचालक के विरुद्ध न्यायालय में वाद दायर कराया जाता है।





बाहर से लिखा इंजेक्शन व दवाएं
बाजारशुकुल निवासी राम किशोर बुखार व टायफाइड से पीड़ित थे। बताया कि उन्होंने सीएचसी की ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया तो जांच कराने के बाद डॉक्टर ने बाहर से इंजेक्शन व दवा लिखी। बताया कि मजबूरन करीब 500 रुपये की दवा बाहर से खरीदनी पड़ी।



जनऔषधि केंद्र पर नहीं मिली दवा
जिला अस्पताल में बुधवार को ओपीडी में दिखाने आए सगरा निवासी रामकरन ने बताया कि बुधवार को सीने में दर्द की परेशानी को लेकर उपचार करवाने आए थे। डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन वह दवा जन औषधि केंद्र पर नहीं मिली। मजबूरी में प्राइवेट स्टोर से लेनी पड़ी। बताया कि दवा का सेवन करने संग डॉक्टर ने रायबरेली एम्स में हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी है।
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