इन्हौना (अमेठी)। तिलोई ब्लॉक क्षेत्र के राजापुर हलीम स्थित मां काली मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक आचार्य बागीस रामचंद्रदास महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई।
प्रवाचक ने कहा कि परीक्षित राजा युधिष्ठिर के पोते और अर्जुन के पौत्र थे। उनके पिता राजा अभिमन्यु और माता उत्तरा थीं। अभिमन्यु की मृत्यु महाभारत युद्ध में हुई थी और उस समय उत्तरा गर्भवती थीं। युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने दिव्य रूप से बचाया था। जब दुर्योधन ने श्रीकृष्ण की उपस्थिति के बावजूद उत्तरा के गर्भ में पांडवों के वंश को नष्ट करने का प्रयास किया था तो भगवान कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को जीवित किया।
राजा परीक्षित का जन्म एक दिव्य घटना थी, क्योंकि उनके जन्म से पहले उनके जीवन की रक्षा भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। वे बहुत ही ज्ञानी और न्याय प्रिय राजा थे। उनका नाम इतिहास में विशेष रूप से उस समय के धर्म, न्याय और राजनीति के पक्षधर के रूप में प्रसिद्ध है। उनका जीवन संस्कृत के महान ग्रंथ भागवतम् से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें उनकी जीवन गाथा और आत्मज्ञान का वर्णन किया गया है। इस मौके पर मुख्य यजमान रामभरोसे तिवारी, दद्दू तिवारी, अनुपम, आनंद, बब्लू आदि मौजूद रहे।