गौरीगंज (अमेठी)। इन दिनों पावर कारपोरेशन मनमानी पर उतर आया है। ट्रांसमिशन के जिम्मेदार कहते हैं 14 से 15 घंटे आपूर्ति दे रहे हैं और उपकेंद्र कर्मी कहते हैं जो मिल रही वह दी जा रही है। ऐसे में हालात यह हो गए हैं कि ग्रामीणों को रात हो या दिन जागकर ही पूरा समय बिताना पड़ रहा है। बेनीपुर उपकेंद्र के गुंगवाछ फीडर में 26 अप्रैल को 24 घंटे में सिर्फ 5.31 घंटा आपूर्ति दी गई।
पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था दिन ब दिन चरमराती जा रही है। 24 घंटे की जगह बामुश्किल ग्रामीणों को सात से आठ घंटे आपूर्ति मिल रही है। पूरी रात में आपूर्ति एक से सवा घंटेे ही मिल रही है। दोपहर में जब तापमान अपने शबाब पर होता है, तब आपूर्ति नहीं रहती है। गांवों की स्थिति तो ऐसी हो गई है कि लोगों को न तो दिन में और न रात में किसी समय राहत मिल रही है।
दिन की तपती दोपहरी में गर्मी के चलते तो रात में गर्मी के साथ मच्छरों के प्रकोप से लोग अपनी नींद तक पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि उनकी ओर से आपूर्ति 14 से 15 घंटे दी जा रही है तो उपकेंद्र स्तर पर बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है। जब कंट्रोल से आपूर्ति दी जा रही है तो वह ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच रही है। पावर कारपोरेशन की इस व्यवस्था से अब पूरे जिले के ग्रामीणों को आक्रोश बढ़ रहा है।
यदि समय पर जिला प्रशासन व पावर कारपोरेशन नहीं चेता तो किसी भी दिन स्थिति गंभीर हो सकती है। मामले में एसडीओ अमेठी अमरजीत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कटौती ऊपर से हो तो रही है लेकिन इतनी नहीं। 24 घंटे में 5.31 घंटा आपूर्ति मिलने की बात को उन्होंने असंभव बताते हुए कहा कि वे इसकी जांच करेंगे।इतनी बड़ी लापरवाही हो रही है तो जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अमेठी तहसील क्षेत्र के बेनीपुर उपकेंद्र की हालत सबसे खराब है। यहां के गुंगवाछ फीडर की बात करें तो 26 अप्रैल को महज पांच घंटा 31 मिनट आपूर्ति मिली है। ग्रामीणों के अनुसार 26 अप्रैल को सुबह 4.38 बजे आपूर्ति मिली और सुबह 9.42 मिनट पर बंद हो गई। इसके बाद दोपहर 2.23 मिनट पर आपूर्ति आई और 37 मिनट बाद तीन बजे बिजली काट दी गई। फिर शाम 5.45 बजे आपूर्ति मिली तो 30 मिनट चलकर 6.15 बजे कट गई।
फिर रात 9.30 बजे आपूर्ति दी गई जो 20 मिनट बाद 9.50 बजे काट दी गई। जबकि ट्रांसमिशन अफसरों का कहना है कि आपूर्ति 12 से 14 घंटे दी जा रही है। उपकेंद्र पर तैनात कर्मी से जब फोन पर ग्रामीणों ने बात की तो पता चला कि जेई शटडाउन लेकर कुछ काम करवा रहे थे। सवाल उठता है जब इतनी कटौती हो रही है तो लाइन पर काम कटौती के समय करवाना चाहिए न कि आपूर्ति मिलने के समय।