अमेठी में पितरों का पिंडदान और तर्पण कराते आचार्य।-संवाद
अमेठी। पितृ पक्ष की त्रयोदशी पर जिलेभर में घरों और घाटों पर श्राद्ध व तर्पण आस्था और श्रद्धा के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने पितरों का स्मरण कर विधिवत तर्पण किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र के निर्देशन में विशेष श्राद्ध अनुष्ठान संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को चारों वर्णों के लिए पिंडदान किया गया। अज्ञात नाम गोत्र सात्त्विक प्रेत, अज्ञात नाम गोत्र राजस प्रेत और अज्ञात नाम गोत्र तामस प्रेत के लिए विधिवत श्राद्ध संपन्न हुआ, जो सभी वर्णों के लिए कल्याणकारी है।
आचार्य ने कहा कि पितृ पक्ष केवल पितरों की तृप्ति का पर्व ही नहीं, बल्कि यह हमें संस्कार और परंपरा से जोड़ने वाला अवसर भी है। अज्ञात पितरों के उद्धार के लिए किया गया पिंडदान समाज को यह संदेश देता है कि हर आत्मा का सम्मान होना चाहिए। श्रद्धालु मुकेश शर्मा ने कहा कि श्राद्ध करने से मन को शांति और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। यह परंपरा हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है।
करन ने कहा कि हमारी संस्कृति और परंपरा की सबसे बड़ी शक्ति यही है कि हम पितरों को याद कर उनके आशीर्वाद से जीवन को सार्थक बना सकते हैं। गुड्डू ने कहा कि पितृ पक्ष में श्राद्ध करना हमारी जिम्मेदारी है। इससे घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का भाव आता है। पवन शर्मा ने कहा कि पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना हर संतान का कर्तव्य है। आज तर्पण कर आत्मिक संतोष मिला है। विनोद कुमार ने कहा कि श्राद्ध केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पितरों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।
ब्राह्मणों को कराया भोज
त्रयोदशी पर पितरों की तिथि वाले श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों को भोज कराया। ब्राह्मणों का संकल्प और पूजा के बाद उन्हें दक्षिणा और वस्त्र देकर विधिवत विदाई दी। ब्राह्मणों के साथ ही गाय, कौवा और कुत्तों को भी भोज दिया। मान्यता है कि इन्हें भोज देने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।