गौरीगंज चौक बाजार स्थित डाकघर के बाहर मौजूद शिक्षक। स्त्रोत : संगठन
अमेठी सिटी। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को सभी डाकघरों में शिक्षकों के परिजनों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी। इसमें टीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश पर आपत्ति जताते हुए 2017 के संशोधन निरस्त करने की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप मिश्र ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में 2017 के संशोधन के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने सभी के लिए टीईटी अनिवार्य कर दी, जो अन्यायपूर्ण है। संगठन मांग कर रहा है कि वर्ष 2017 में किए गए आरटीई 2009 संशोधन को निरस्त किया जाए। जिला उपाध्यक्ष अरविंद पांडेय और दिनेश तिवारी ने बताया कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो अपनी जन्म से पहले की पीढ़ी पर लागू हो, लेकिन इस आदेश में इसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई है।
गौरीगंज में अध्यक्ष सतेंद्र सिंह और सहसंयोजक रमेश प्रजापति के नेतृत्व में शिक्षक डाकघर पहुंचे और परिवारों की चिट्ठी एक साथ रजिस्टर डाक से प्रधानमंत्री को भेजी। परिवारों ने चिट्ठी में अवगत कराया कि नौकरी छूटने पर बच्चों की फीस, बीमारी का इलाज और परिवार के अन्य खर्च कैसे संभाले जाएंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री से 2017 के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। मांग पूरी न होने पर आगामी चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी। इसी तरह अन्य डाकघरों में भी कार्यक्रम हुए। शाहगढ़ में श्याम बहादुर शुक्ला और विश्वबंधु उपाध्याय, अमेठी में विवेकानंद द्विवेदी, बाबूगंज में रजनीश द्विवेदी और फारूक अहमद, फुरसतगंज में महेश तिवारी, रानीगंज में दिनेश यादव, जायस में रुस्तम कुमार, भेटुआ में महेंद्र जायसवाल और मुसाफिरखाना में दिनेश तिवारी ने अभियान की अगुवाई की।