गौरीगंज (अमेठी)। मुसाफिरखाना थाने में आरक्षी बैरक के साथ अन्य निर्माण के लिए धन की कमी अब आड़े नहीं आएगी। कार्यदायी संस्था की मांग पर शासन ने पुनरीक्षित आगणन को मंजूरी देते हुए 1.49 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त अवमुक्त करते हुए कार्यदायी संस्था को समय से गुणवत्ता परक निर्माण कार्य पूरा करते हुए उपभोग प्रमाण पत्र देने का निर्देश दिया है।
पुलिस कर्मियों की परेशानी को दूर करने के लिए 27 दिसंबर 2016 को अपर पुलिस महानिदेशक की मांग पर शासन ने मुसाफिरखाना में निरीक्षक, उपनिरीक्षक और आरक्षियों के लिए बैरक निर्माण को मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद लखनऊ को देते हुए स्थानीय दर पर अनुमानित आगणन तैयार करने के साथ मानचित्र स्वीकृत कराने को कहा था।
शासन का पत्र मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने सात करोड़ 49 लाख 58 हजार रुपये का डीपीआर तैयार किया तो शासन ने वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए तीन करोड़ की पहली किस्त अवमुक्त कर दी। राशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू किया था। अवमुक्त राशि का उपभोग करने के बाद संस्था ने शासन से अवशेष राशि देने की मांग की।
कार्यदायी संस्था की मांग पर शासन ने 30 मई को तीन करोड़ रुपये की दूसरी किस्त दी। दूसरी किस्त का उपभोग होने के बाद शासन ने एक करोड़ 49 लाख 58 हजार रुपये की अंतिम किस्त अवमुक्त कर दिया है। उप सचिव पद्माकर शुक्ल ने कार्यदायी संस्था को पत्र भेजकर डेडलाइन में गुणवत्ता परक निर्माण कार्य पूरा करने का आदेश देते हुए एसपी अमेठी को निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करने को कहा है।
यह हो रहा निर्माण
एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि मुसाफिरखाना थाने में कर्मियों की सहूलियत के लिए श्रेणी एक (स्पेशल) के 12, श्रेणी दो के छह तथा श्रेणी तीन के चार आवास के साथ 48 सिपाहियों के आरक्षी बैरक का निर्माण चल रहा है। निर्माण के साथ बाउंड्रीवाल, प्रसाधन, पेयजल व अन्य सुविधाओं का भी निर्माण कार्य होगा।