शाहगढ़ स्थित पानी के अभाव में धान के खेत में पड़ी दरार।
अमेठी सिटी। जिले में इस बार बारिश बहुत कम हुई है। वहीं, बिजली के आने-जाने का भी कोई समय नहीं है। नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। धान की रोपाई कर चुके किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। समय से इस समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो धान की पैदावार प्रभावित होने की प्रबल आशंका है।
जिले में 1.30 लाख हेक्टेयर में धान की फसल की रोपाई का अनुमान है। मानसून लगातार किसानों को दगा दे रहा है। सावन में बारिश की जगह तपिश किसानों को बेहाल कर रही है। फसलें पानी के अभाव में मुरझा रही हैं। कृषि विभाग के अनुसार, 22 जुलाई तक हुई बारिश के आंकड़ों में अमेठी प्रदेश में 53वें स्थान पर है। एक जून से 22 जुलाई तक जिले में 212.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ 99.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो करीब 46.8 फीसदी है।
नहरों में टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी : आसमान की ओर निहार रहे किसान थक हारकर नहरों में पानी आने की राह देख रहे हैं। यहां भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है। माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचा, जिससे नहरों पर आश्रित धान की फसल मुरझाकर सूखने के कगार पर हैं। जिले की छह सिंचाई खंडों के रजबाहा व माइनर को मिले कुल 310 नहरों से 73 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।
विभाग के अनुसार, इस समय सिंहपुर, दिछौरा, टिकरी, सुबेहा, औरंगाबाद, डीह व सुबेहा रजबाहा की 148 नहरों में पानी है। जबकि जायस, अमेठी, इन्हौना, चिलबिला रजबाहा की 162 नहरों में पानी नहीं है। विभाग के नोडल अधिकारी मनीष रंजन ने बताया कि रोस्टरवार नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है।