अमेठी सिटी। विकास भवन में बृहस्पतिवार सुबह डीडीओ वीरभान सिंह न खोजे मिले और न ही परियोजना निदेशक ऐश्वर्य यादव। सीडीओ सूरज पटेल भी समय से दफ्तर नहीं पहुंचे। उनके अलावा 21 जिला स्तरीय अधिकारी समय प्रबंधन में फेल मिले। जब चिराग तले ही अंधेरा हो तो विकास कार्यों की गति क्या होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सुबह 10:04 से 10:29 बजे के बीच विकास भवन की पड़ताल की गई। इस दौरान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए कार्यालय में नहीं दिखे।
इसी तरह अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग प्रखंड, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी, जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य अधिकारी, सहायक अभियंता लघु सिंचाई द्वितीय, सहायक अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग, लोकपाल मनरेगा, उपायुक्त श्रम रोजगार, जनसूचना वाद, सोशल ऑडिट एवं पेयजल कक्ष में अफसरों की कुर्सियां खाली रहीं। उपायुक्त स्वत: रोजगार प्रवीणा शुक्ला और जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार त्यागी अपने कार्यालय में मौजूद थे।
सीडीओ कार्यालय में स्टेनो सहित अन्य कर्मी मौजूद मिले। 10:28 बजे सीडीओ के स्टेनो ने बताया कि साहब कलेक्ट्रेट गए हैं। इसी बीच 10:29 बजे सीडीओ सूरज पटेल विकास भवन पहुंचे। डीडीओ वीरभानु सिंह ने बताया कि वह समय से कार्यालय पहुंच गए थे और अकाउंटेंट के पास बैठकर रिपोर्ट बनवा रहे थे।
नहीं हो रही जनसुनवाई
विकास भवन के बाहर 10:51 बजे जगदीशपुर के कठौरा निवासी रमपता व उनके बेटे जोधे मिले। जोधे ने बताया कि खेती नहीं है। मां रमपता की पेंशन बंद हो गई है। दो बार से विकास भवन का चक्कर काट रहा हूं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आज फिर मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं जगदीशपुर से अपने बेटे के साथ आईं कमरुल निशा ने बताया कि विधवा पेंशन बंद है। यहां आने पर समाज कल्याण विभाग में मिले कर्मी टालमटोल कर रहे हैं।
जल्द सुधारेंगे व्यवस्था
सभी अफसरों व कर्मचारियों को समय से ऑफिस आना चाहिए। मुझे जिलाधिकारी ने बुलाया था, इसलिए कार्यालय आने में देरी हुई। जल्द व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
-सूरज पटेल, मुख्य विकास अधिकारी