अमेठी सिटी। जिले में बड़ी अजीबोगरीब स्थिति है। जो जिंदा है, उसे मृत दिखा पेंशन रोक दी जा रही है, और जिनकी मृत्यु हो गई है, उनके घरवाले मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए महीनों से भटक रहे हैं। ऐसे मामलों को अफसर भी संजीदगी से नहीं ले रहे हैं। आम लोगों की सरकारी तंत्र पर विश्वसनीयता कम होने की एक बड़ी वजह यह भी है।
पहला मामला भेटुआ ब्लॉक की घटमापुर मजरे शिवगढ़ जलालपुर ग्राम पंचायत का है। दयाशंकर पांडेय (74) बृहस्पतिवार को ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और बताया कि वह जिंदा हैं, 70 वर्षीय पत्नी सुभद्रा के साथ रहते हैं। संतान न होने के कारण उनकी आजीविका का मुख्य साधन पेंशन थी, जो उन्हें चार साल पहले स्वीकृत हुई थी। सितंबर 2024 से अचानक पेंशन बंद हो गई। पेंशन बहाली के लिए उन्होंने ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों से संपर्क किया, तो पता चला कि विभाग ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है। वह 10 महीने से खुद को जीवित साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयाें के चक्कर लगा रहे हैं।
दूसरा प्रकरण गौरीगंज ब्लॉक के धनी जलालपुर का है। गांव के राम खेलावन की बीमारी की वजह से इसी वर्ष 18 मार्च को मृत्यु हो गई थी। उनका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बहन गुड़िया तीन बार ग्राम पंचायत विकास अधिकारी फैजल को शपथपत्र, चार गवाहों के बयान, आधार कार्ड सहित अन्य जरूरी प्रपत्र दे चुकी हैं। वीडीओ कभी 21 दिन तो कभी 10 दिन बाद आने की बात कहकर टरका रहे हैं। राम खेलावन की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकारी कागजों पर अभी भी वह जीवित हैं।
नए सिरे से करना होगा आवेदन
जिला समाज कल्याण अधिकारी नलिनराज श्रीवास्तव ने दयाशंकर पांडेय के प्रकरण में बताया कि पेंशन बंद किए जाने का मामला तीन महीने के भीतर का है तो पेंशन बहाल की जा सकती है। तीन माह से ज्यादा वक्त हो गया है, तो नए सिरे से आवेदन करना होगा। उन्होंने कहा कि पेंशनरों का सत्यापन ग्राम पंचायत सचिवों ने किया था। उनकी सत्यापन रिपोर्ट को बीडीओ ने स्वीकृत कर डेटा अपडेट किया। दयाशंकर के प्रकरण को चेक कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जांच में लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
गौरीगंज में तैनात एडीओ पंचायत पंकज मोहन मिश्र ने राम खेलावन के प्रकरण में बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में इतना विलंब क्यों हुआ, इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही मिली तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।