अमेठी। नवजात की समुचित देखभाल उसके बचपन को खुशहाल बनाने के लिए बहुत ही जरूरी है। इससे शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। नवजात शिशु देखभाल सप्ताह अभियान के तहत माताओं को इन्हीं बिंदुओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सीएमओ को पत्र भेजकर नवजात शिशु देखभाल सप्ताह की प्रमुख गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों के बारे में कई दिशा-निर्देश दिया है। निदेशक के निर्देश पर इन दिनों जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नवजात शिशु देखभाल सप्ताह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा देने के साथ ही बीमार नवजात शिशुओं की पहचान के बारे में जागरूक करने के साथ ही सरकार द्वारा चलाये जा रहे बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी जानकारी दी जा रही है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय गौरीगंज में कार्यरत परामर्शदाता व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सक्सेना ने बताया कि नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिए जरूरी है कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं।
प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में ही रुकें। नवजात को जन्म के तुरंत बाद नहलाएं नहीं सिर्फ उसके शरीर पोछकर नर्म व साफ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराएं।
जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और विटामिन का इंजेक्शन लगवाने के साथ ही नियमित और संपूर्ण टीकाकरण कराएं। कम वजन और समय से पहले जन्मे बच्चों पर विशेष ध्यान दें और शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) की विधि अपनाएं।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि सप्ताह का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल करने के बारे में जनसमुदाय को जागरूक कर नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।