गौरीगंज (अमेठी)। कोविड के बाद अब मंकीपॉक्स को लेकर स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री ने जहां कोविड अस्पतालों में दस बेड का वार्ड सुरक्षित कर सक्रिय रहने का निर्देश दिया है वहीं जिले का स्वास्थ्य विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।
अमेरिका, यूके, आस्ट्रेलिया व कनाडा आदि देशों में तेजी से फैले मंकीपॉक्स की आंच अब देश में भी पहुंच गई है। इस बीमारी से बचने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों के साथ बैठक कर इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। सीएम के निर्देश के बाद बुधवार देर शाम अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रकाश ने वीसी के माध्यम से सभी डीएम व सीएमओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा है कि कोविड अस्पतालों में दस बेड मंकीपॉक्स से ग्रसित मरीजों के लिए आरक्षित कर दें। इसके लक्षण व बचाव के लिए जन जागरुकता का भी निर्देश दिया गया है। एसीएस का निर्देश मिलने के बाद जिले का स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है।
सभी अस्पताल अधीक्षकों को अपने क्षेत्र की आशा व एएनएम के साथ ही पूर्व में गठित रैपिड रिस्पांस टीमों को सक्रिय करने को कहा गया है। सभी को अपने क्षेत्र में में इस बीमारी के लक्षण व बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने व किसी भी गांव में ऐसे लक्षण वाले मरीज मिलने पर तत्काल इसकी सूचना अस्पताल अधीक्षक को देते हुए कार्रवाई को कहा गया है।
यह हैं लक्षण
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल के अनुसार लगातार बुखार आना, सिर दर्द होना तथा प्रमुख रूप से हाथ की हथेली व पैर के तलुए में चकत्ते पड़ना इसका मुख्य लक्षण हैं। वैसे यह दो से चार सप्ताह में स्वयं ठीक हो जाता है। इसकी अभी कोई वैक्सीन व दवा नहीं है। बचाव ही इसका प्रमुख श्रोत है। ऐसे लोग साफ-सफाई रखें तथा लक्षण वाले व्यक्ति को एक स्थान पर सुरक्षित रहने की व्यवस्था बनाएं। उनके संपर्क में किसी को न आने दें। एक दूसरे के संपर्क में जाने से यह बीमारी बढ़ती है।
पूरी है तैयारी : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने कहा कि जनपद स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी अधीक्षकों को इस बाबत निर्देश गया है। पूर्व से आरक्षित कोविड अस्पतालों में बेड सुरक्षित हैं। ऐसे लक्षण वाले मरीज मिलने पर उसकी गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में भर्ती करने व उसकी सामान्य स्थिति में उसे उसके घर पर ही आइसोलेट कराया जाएगा। ऐसे मरीज का सैंपल लेकर उसे जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा।