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Amethi News: ई रिक्शे से जिंदगी की गाड़ी चला रहीं मोना

Tue, 04 Mar 2025 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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जगदीशपुर के जामो-वारिसगंज मार्ग पर ई-रिक्शा पर बच्चे को साथ बैठा कर सवारी ले जाती मोना यादव। -स
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जगदीशपुर (अमेठी)। सपनों की उड़ान तब भी नहीं रुकी जब हालात ने मोना के रास्ते मुश्किलों से भर दिए। सास-ससुर की माैत व पति के अहमदाबाद चले जाने के बाद जिम्मेदारियों का पहाड़ सिर पर टूट पड़ा, लेकिन मोना ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी नन्ही बेटी की परवरिश के लिए उन्होंने ई रिक्शा की हैंडिल संभाला और सड़कों पर निकल पड़ीं, जीवन की गाड़ी को नई दिशा देने। बेटी को गोद में लिए, मोना जब रिक्शा चलाती हैं, तो हर मोड़ पर उनकी हिम्मत और संघर्ष की नई कहानी लिखी जाती है।
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जी हां...हम बात कर रहे हैं जामों थाना क्षेत्र के कटारी निवासी मोना यादव की। परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी और पति की कमाई से गुजारा मुश्किल से हो रहा था। शादी के कुछ ही वक्त बाद सास और ससुर चल बसे। इसके बाद पति परिवार चलाने के लिए अहमदाबाद चले गए। वहां रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगे। ऐसे में मोना दो बच्चों के साथ घर पर अकेले ही रहने लगीं। पति की कमाई से गृहस्थी चलाना ही मुश्किल था और अब बड़े बेटे की पढ़ाई की चिंता उसे सताने लगी। ऐसे में मजबूत इरादे के साथ घर की ड्यौढ़ी से बाहर निकलकर मोना ने कमाई करने की सोची।



ग्रामीण क्षेत्र में ऐसा करना मोना के लिए आसान नहीं था, लेकिन उसने बिना परवाह किए अपने निश्चय पर कायम रहते हुए ई रिक्शा खरीदा और खुद ही उसे चलाने लगी। जामो-वारिसगंज मार्ग पर हाईवे के किनारे मोना यादव ई रिक्शा पर सवारियों को लेकर जा रही थी। उसके साथ तीन वर्षीय बेटी शादवी भी बगल में बैठी रहती थी। ऐसे में रिक्शा चलाना और नन्ही बेटी को संभालना उनके लिए आसान नहीं था। मोना बताती हैं कि ई रिक्शा चलाकर मिलने वाले किराए से वह घर के खर्च के साथ बेटे की पढ़ाई के लिए फीस जुटाती हैं।
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बड़ा बेटा सात साल का है जो पढ़ने जाता है और दूसरी बेटी तीन साल की है। छोटी बेटी को देखने वाला घर पर कोई नहीं है, इसलिए वह उसे साथ लेकर ही ई रिक्शा चलाने जाती हैं। मोना कहती हैं कि वह अपने बेटे को आईएएस अधिकारी बनाना चाहती हैं। इसके लिए उसने बेटे का दाखिला निजी स्कूल में कराया है। खुद तकलीफ उठाकर भी मोना बच्चे की शिक्षा के लिए पैसे जुटाती हैं।
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