तिलोई के चेतरा बुजुर्ग गांव में शिव महापुराण कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
तिलोई। चेतरा बुजुर्ग गांव में आयोजित शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन सोमवार को प्रवाचक गरुणेश महाराज ने भगवान शिव के विविध स्वरूपों के प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति का मर्म समझाया। उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन करते हुए सद्कर्मों और समर्पण का संदेश दिया। कहा कि भगवान शिव की भक्ति का अर्थ केवल पूजा-अर्चना नहीं बल्कि सेवा, विनम्रता और मर्यादा के मार्ग पर चलना भी है।
प्रवाचक ने बताया कि भगवान शिव भक्तों की परीक्षा लेने के लिए दुर्वासा ऋषि के रूप में प्रकट होते हैं। भगवान श्रीराम की सेवा में हनुमान का स्वरूप और गोपियों के साथ रासलीला के प्रसंग में गोपेश्वर रूप शिव की विविध लीलाओं को दर्शाता है। इन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में अहंकार के बजाय सेवा और विनम्रता का महत्व है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा के साथ भगवान शिव के दर्शन और स्मरण से भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है। शिव महापुराण की कथा जहां होती है, वह स्थान तीर्थ के समान पवित्र हो जाता है। इस मौके पर रोहित सिंह, बबलू मिश्रा, वीर सिंह, बबलू सिंह आदि मौजूद रहे।