अमेठी के रानीपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।-स्रोत : आयोजक
अमेठी। कई जन्मों का पुण्य एकत्रित होने पर ही भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है। भागवत कथा साक्षात् कल्पवृक्ष के समान है। जिस मनोरथ के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया जाता है, उसकी सिद्धि होती है। ये बातें रानीपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवाचक आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि कलयुग में कथाओं के संचालन का अर्थ ही प्रभु की प्राप्ति एवं मनुष्य को सही मार्ग दिखाना है। उन्होंने बताया कि सुख और दुख जीवन में एक सिक्के के दो पहलू हैं। कभी सुख आता है और कभी दुख, जिस प्रकार समय का पहिया हमेशा चलता रहता है, उसी प्रकार दुख और सुख भी आते और जाते रहते हैं।
इन दोनों की भी एक अवधि होती है। मनुष्य के जीवन में जब कभी कुछ भी ज्ञान न होने की स्थिति आए तो उसे शास्त्रों से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस दौरान यजमान राजकुमारी, मंजू सिंह, अनुपम मिश्र, सुमित सिंह, अनुराग मिश्र, युवराज सिंह, अंश सिंह, रवींद्र पाण्डेय, अभिषेक मिश्र आदि मौजूद रहे।