जामों के हरगांव में कथा सुनते श्रद्धालु।स्रोत-आयोजक
जामों। भगवान को हमेशा अपने भक्तों व धर्म की रक्षा करने की चिंता लगी रहती है। श्रीकृष्ण ने धरती पर दैत्य शक्तियों के नाश और भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लिया था। ये बातें हरगांव बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को अयोध्या धाम से आए प्रवाचक आचार्य दिनकर महाराज ने कहीं।
उन्होंने भगवान के वामन अवतार, रामावतार और कृष्ण जन्मोत्सव का विस्तार से वर्णन कर श्रोताओं को भक्तिभाव में सराबोर कर दिया। अत्याचारी कंस के पाप खत्म करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद माता देवकी गर्भवती हुईं तो कंस को मृत्यु का भय सताने लगा। भगवान के पैदा होने का समय नजदीक आता देख कारागार की व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। जब प्रभु को अवतरित होना था तो सारे बंधनमुक्त हो गए, पहरेदार भी सो गए।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। भगवान के दर्शन पाने के लिए मनुष्य को निर्मल मन से भजन-कीर्तन करना पड़ेगा। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की झांकी प्रस्तुत करवाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान अमित कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी कुसुमलता श्रीवास्तव, मंदिर के महंत रेखादास, कालिका प्रसाद शुक्ल, आनंद सिंह, बबलू पांडेय, सौरभ पांडेय, रामगोपाल मिश्र, आयुष आदि मौजूद रहे।