तिलोई। गोकुलवासियों की गोवर्धन पूजा से नाराज इंद्रदेव ने भीषण बारिश की। सात दिन तक लगातार बारिश कर इंद्रदेव ने गोकुल को तहस-नहस करने की ठानी। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाकर ग्वालबालों के साथ ही गोकुलवासी और उनकी गायों को पर्वत के नीचे सुरक्षित कर इंद्र का घमंड तोड़ दिया। ये बातें पूरेदान सिंह वैस मेढ़ौना में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक आचार्य शांतनु महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भगवान की लीला से लज्जित होने के बाद इंद्रदेव ने श्रीकृष्ण की स्तुति की। सभी ब्रजवासी इस घटना से ये भांपने लगे कि कन्हैया अवश्य कोई भगवान हैं, परंतु भगवान ने कहा कि नहीं, ये सब गोकुलवासियों के सहयोग से ही संभव हुआ है। प्रवाचक ने पवित्र महारास का वर्णन किया। कहा कि जब भगवान ने अपनी बंशी बजाई है, तब सभी गोपियां जिस अवस्था में थीं, उसी में भगवान से मिलने के लिए निकल पड़ीं।
मुख्य यजमान अर्चना सिंह, कृष्ण कुमार सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आरती पूजन किया। इस मौके पर राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, मृगांकेश्वर शरण सिंह, उत्कर्ष शरण सिंह, डीपीआरओ मनोज त्यागी, रमेश चंद्र, हीरामणि पटेल, दिलीप गंगवार, हरिनाथ यादव, मनीष सिंह, इंद्रजीत सिंह, दलजीत सिंह, नितेश यादव आदि मौजूद रहे।