अमेठी सिटी। जब से एसटीएफ ने ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की है तब से लोकेटर्स ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। चेकिंग के लिए निकले एआरटीओ और पीटीओ की पल-पल की जानकारी लोकेटर अपने आका से साझा करते हैं ताकि ओवरलोड वाहनों को दूसरे रास्तों से निकाला जा सके। इस बाबत एआरटीओ विभागीय अधिकारियों संग एसपी व डीएम से शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने लोकेटर्स से जान का खतरा होने तक की आशंका जताई है।
अमेठी जिले में रायबरेली-मोहनगंज-जगदीशपुर-इन्हौंना और सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ मार्ग पर सबसे ज्यादा ओवरलोड वाहनों का आवागमन होता है। इन मार्गों पर जब भी अधिकारी निकलते हैं, इसकी जानकारी पहले ही ट्रक मालिकों तक पहुंच जाती है। लोकेटर परिवहन विभाग के अधिकारियों के आसपास ही रहते हैं और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। आवास, ऑफिस से निकलने तक की खबर उन्हें पता होती है।
एआरटीओ महेंद्र बाबू गुप्ता ने ये भी बताया कि लोकेटर्स के पास तीन-चार एसयूवी गाड़ियां हैं। इसके अलावा कारों से भी पीछा किया जाता है। बमुश्किल 100 से 200 मीटर दूरी से उन पर नजर रखी जा रही है। रात में लोकेटर स्टंटबाजी करके उन्हें भयग्रस्त करने की भी कोशिश करते हैं।
पीटीओ दिनेश कुमार ने बताया कि पहले सीमेंट लदी गाड़ियों में तिरपाल लगी होती थी, लेकिन अब गिट्टी व मौरंग लदी गाड़ियां भी तिरपाल से ढककर पास कराई जा रही हैं। हाल के दिनों में चेकिंग के दौरान ये बात सामने आई। उन्होंने बताया कि जगदीशपुर का एक शख्स पूरा रैकेट चला रहा है। गाड़ियों में लोकेटर्स के साथ महिला भी होती है। उनसे पूछा जाता है तो वे परिवार के साथ यात्रा करने की बात कहकर बच निकलते हैं।
85 ओवरलोड वाहन पकड़े, 15 लाख जुर्माना वसूला
एआरटीओ ने बताया कि लोकेटर्स की सक्रियता के बावजूद 15 दिनों में 85 ओवरलोड ट्रकों पर चालान व सीज की कार्रवाई की गई। 15 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। इन पर कार्रवाई हो जाए तो ओवरलोडिंग पर काफी हद तक अंकुश लगा सकते हैं।