अमेठी सिटी। रामकथा सुनने से मनुष्य को मुक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर जल्द ही प्रसन्न होते हैं। ये बातें अमेठी के आवास विकास कॉलोनी में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन मंगलवार को प्रवाचक पंडित कृष्णानंद महाराज ने श्रोताओं को प्रभु श्रीराम, माता सीता व शिव विवाह प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि प्रेम के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। अहंकार और क्रोध के आने पर मनुष्य का विवेक और बल दोनों क्षीण हो जाता है। धनुष भंग का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि स्वयंवर में सभी राजा अपने बल के अहंकार से भरे हुए थे। इसलिए कोई भी राजा धनुष को हिला तक नहीं सका। धनुष भंग के बाद अपनी शक्ति के अहंकार में पहुंचे परशुराम ने अपना प्रभाव दिखाना चाहा। लक्ष्मण ने बार-बार क्रोध दिला कर उनकी शक्ति को नष्ट कर दिया।
प्रवाचक ने कहा कि भाव बिना भक्ति संभव नहीं है। जिस प्रकार भगवान राम का जीवन भाव से भरा है। उसी प्रकार माता सीता भी भक्ति का रूप हैं। कथा व्यास ने कहा कि जब सच्ची भक्ति होती है तो हमारी मनोकामना भी पूरी हो जाती है। श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुरी में प्रवेश का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जीवन में गुरु का बड़ा महत्व है। इस दौरान संतोष चतुर्वेदी, रमेश तिवारी, भगवत प्रसाद मिश्र आदि मौजूद रहे।