गौरीगंज (अमेठी)। शहरी क्षेत्र में धरा पर घट रही पेड़ों की संख्या व ऑक्सीजन की कमी को रोकने के लिए जिले के चारों निकाय में नंदन वन की स्थापना होगी। वन में छायादार वृक्ष के साथ सुगंधित फूल के पौधे रोपित कर तैयार किया जाएगा। वन तैयार होने के बाद शहरी क्षेत्र में लोगों को प्राकृतिक वातावरण में घूमने की सुविधा मिलेगी तो जीवनदायिनी ऑक्सीजन में बढ़ोत्तरी होगी। उत्तर प्रदेश क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान के तहत हुए सर्वे में पर्यावरण की दृष्टि से अमेठी को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इस स्थिति से निपटने व पर्यावरण संरक्षण बेहतर बनाने के लिए वन विभाग लगातार अभियान चलाकर पौधरोपण करने में जुटा है। आगामी वर्षा काल में 45.06 लाख पौधे रोपित करने की तैयारी में जुटा है। नगरीय क्षेत्र में सर्वाधिक हरियाली व पर्यावरण की आवश्यकता को देखते हुए नंदन वन तैयार करने की योजना बनाई है।
योजना के तहत जिले में चारों निकाय में एक हेक्टेयर भूमि पर नंदन वन तैयार करने के लिए जमीनइ की तलाश शुरू हो गई। अब तक गौरीगंज नगर पालिका परिषद क्षेत्र के पचेहरी वार्ड मेंं नंदन वन के भूूमि चिन्हित करने का काम भी पूरा हो गया है। अन्य निकाय जायस, अमेठी व मुसाफिरखाना में भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि मिलने के बाद छायादार पौधों के साथ सुगंधित फूल के पौधे से वन को तैयार किया जाएगा। नंदन वन में पौधे रोपित होने व तैयार होने से शहरी क्षेत्र में जीवनदायिनी ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी।
इन प्रजातियों के लगेंगे पौधे
नंदन वन में मुख्य रूप से फलदार, छायादार, औषधीय, पर्यावरणीय तथा सांस्कृतिक महत्व के पौधों को वरीयता दी जाएगी। वन में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद व राज्य वृक्ष अशोक के साथ पीपल, पाकड़, गूलर, अशोक, नीम, आम, हरड़, बहेडा, बेल, महुआ, सहजन, आंवला, जामुन, शीशम, इमली, अर्जुन, जामुन प्रजाति के पौधे स्थानीय कृषि जलवायु के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में रोपित किए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय कृषि जलवायु के अनुरूप कृषि वैज्ञानिकों एवं उद्यान विभाग के परामर्श अनुसार संबंधित क्षेत्रों में पौधों का चयन किया जा सकेगा। इन पौधों में कई का औषधीय महत्व भी है। ऐसे में अमृत उद्यान में लगने वाले पौधे पेड़ बनने के बाद ऑक्सीजन बढ़ाने के साथ ही औषधीय रूप में भी उपयोगी साबित होंगे।
सुरक्षा की समुचित व्यवस्था
नंदन वन की पांच वर्षों तक देखरेख एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी नगरीय क्षेत्र में कर्मियों की होगी। इन उद्यानों की पौध बढ़ने के बाद लोगों को प्राणवायु मिलने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी होगा। वन सुरक्षा के लिए पांच वर्ष तक रोपित पौधों की पूर्ण सुरक्षा व सघन देख-रेख की व्यवस्था बनाई गई है। वन में बैठने के साथ पैदल मार्ग, पेयजल के साथ अन्य जनसुविधाओं की भी व्यवस्था की जाएगी।
भूमि मिलने के बाद होगा पौध रोपण
भूमि मिलने के बाद वन स्थापना का कार्य संबंधित नगर निकायों को करना है। वन विभाग की ओर से नियमानुसार पौध उपलब्ध कराई जाएगी। जुलाई में वृहद पौध रोपण अभियान के दौरान नंदन वन के लिए पौध रोपित कर तैयार करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम किया जाएगा।
डीएन सिंह-प्रभागीय वनाधिकारी