मुसाफिरखाना तहसील में प्रदर्शन करते अधिवक्ता। स्त्रोत: संगठन
मुसाफिरखाना। अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन के चलते तहसील परिसर स्थित न्यायालयों में न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। लगातार सुनवाई न होने से वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय पहुंचने पर उन्हें केवल अगली तारीख लेकर लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति 30 दिसंबर से बनी हुई है।
अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ल के नेतृत्व में शुक्रवार को भी उपजिलाधिकारी की कार्यशैली के विरोध में तहसील परिसर और मुख्य द्वार पर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के चलते तहसील न्यायालयों में कोई भी वाद नहीं सुना जा सका। एसडीएम न्यायिक की अदालत में 48, तहसीलदार की अदालत में 27 तथा नायब तहसीलदार मुसाफिरखाना की अदालत में 15 मुकदमे सूचीबद्ध थे, लेकिन सभी मामलों में सुनवाई नहीं हो सकी।
एसडीएम और नायब तहसीलदार जगदीशपुर की अदालत में कोई मुकदमा सूचीबद्ध नहीं रहा। न्यायिक कार्य ठप रहने से दूरदराज से आए वादकारी मायूस होकर लौट गए। कई वादकारियों ने बताया कि बार-बार तारीख पड़ने से समय और धन की हानि हो रही है। इस दौरान अधिवक्ता द्वारिका प्रसाद यादव के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया। अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। शोक सभा के चलते न्यायालय में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य में सहयोग न करने का निर्णय लिया। प्रदर्शन और शोक सभा में सचिव राजीव कुमार तिवारी, इमरान खान, अखिलेश पांडेय, रमानाथ तिवारी, दीपक गोस्वामी, नागेंद्र प्रताप सिंह, अश्विनी श्रीवास्तव सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।