गौरीगंज (अमेठी)। कमरौली थाना क्षेत्र के उतलेवा गांव में एक परिषदीय शिक्षक/प्रधान प्रतिनिधि द्वारा फर्जीवाड़ा करते हुए लखनऊ-वाराणसी हाईवे से सटी बेशकीमती बंजर भूमि (कुछ हिस्सा यूपीसीडा का) बेच डालने का मामला सामने आया है। जांच शुरू हुई तो परिषदीय शिक्षक के अलावा उनके दो चचेरे भाई व लेखपाल की भूमिका संदिग्ध मिली। जांच अधिकारी ने सभी के खिलाफ केस दर्ज कराने समेत अन्य कार्रवाई की संस्तुति की है। जगदीशपुर ब्लॉक का उतलेवा गांव में औद्योगिक त्षेत्र है। औद्योगिक क्षेत्र होने व गांव के बीच से लखनऊ-वाराणसी हाईवे गुजरने से यहां की जमीनें काफी महंगे दामों पर बिकती हैं। डीएम राकेश कुमार मिश्र के आदेश पर जमीन विक्रय में हुए एक फर्जीवाड़े की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राम केवल त्रिपाठी ने की। जांच में मिला कि उतेलवा के रहने वाले परिषदीय शिक्षक राघवेंद्र तिवारी व मोइन अहमद निवासी सिंदुरवा ने आठ साल पूर्व (27 मार्च 2014) गाटा संख्या 871 का 0.0700 हेक्टयेर भूमि का आधा हिस्सा विपत राम से बैनाम लिया था।
बाद में इस जमीन को 29 जनवरी 2015 को उतेलवा के ही रामचंद्र मौर्य को बेच दिया। पूरी जमीन बेचने के बाद राघवेंद्र ने इसी जमीन की आड़ में 871 के खाते में दर्ज बंजर भूमि को बेचना शुरू किया। राघवेंद्र ने 10 फरवरी 2015 को लखनऊ के पीयूष कुमार को (0.0070 हे.), आठ सितंबर 2022 को सत्थिन निवासी अदील को (0.0195 हे.) व 16 फरवरी 2023 को अरियावां के इजहार अहमद को (0.139 हे.) जमीन बेच दी। इसके अलावा इसी जमीन पर अपने चचेरे भाई भूपेंद्र के नाम पर रिश्तेदार तारक नाथ पांडेय का मकान बनवा डाला। राघवेंद्र के चचेरे भाई नागेंद्र व उनकी पत्नी प्रियंका तिवारी (ग्राम प्रधान) पर भी जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण करने की पुष्टि हुई।
इनसेट
18 मार्च को हुई थी शिकायत
मुसाफिरखाना में बीते 18 मार्च को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम राकेश कुमार मिश्र व एसपी डॉ. इलामरन जी. मौजूद थे। उतेलवा के मनोज कुमार शुक्ल ने उन्हें फर्जीवाड़े की बात सुनाई। मनोज की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तत्काल अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को जांच अधिकारी नामित कर रिपोर्ट तलब की थी।
इनसेट
स्कूल नहीं जाता शिक्षक
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिक्षक बाजार शुकुल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, किशनी में तैनात है। विद्यालय नियमित नहीं जाते। अपने स्थान पर उतलेवा के ही पवन यादव को रखा है, वही अध्यापन करते करते हैं। तमाम अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने का उल्लेख है।
वर्जन
डीएम को दे दी रिपोर्ट
जांच में फर्जीवाड़ा की पुष्टि हुई है। आरोपियों ने बंजर अपनी भूमि की आड़ में कई लोगों को बंजर भूमि भी बेची। बंजर भूमि का रकबा 3.1050 हे. है। इसी गाटे में 2.8340 हेक्टेयर भूमि यूपीसीडा को आवंटित है। फर्जीवाड़े में भूमि के भी प्रभावित होने का अंदेशा है। लेखपाल की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। रिपोर्ट डीएम को दे दी गई है।
राम केवल त्रिपाठी-अतिरिक्त मजिस्ट्रेट