अमेठी। नकली रजिस्ट्रेशन की आड़ में छात्राओं से लाखों की ठगी की गई और फीस वसूली के बाद अचानक संस्थान बंद कर दिया गया। पीड़िताओं का कहना है कि अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस में संस्थान संचालकों ने असली दस्तावेजों की कॉपी निकालकर उस पर फोटो और नाम चिपकाकर नकली रजिस्ट्रेशन फॉर्म तैयार किया। इन कागजातों को दिखाकर पूरा सेमेस्टर शुल्क जमा भी कराया गया।
सुमन, सीमा और सौम्या आदि छात्राओं ने बताया कि शुरुआत में उनसे रजिस्ट्रेशन फीस ली गई। कुछ दिनों बाद नकली कार्ड दिखाकर विश्वास दिलाया गया कि उनका नाम दर्ज हो चुका है। इसके बाद शेष शुल्क भी वसूल लिया गया। साथ ही स्कॉलरशिप दिलाने, परीक्षा पास कराने और बेहतर रैंक दिलवाने का भरोसा देकर लगातार पैसे मांगे गए। जिन्होंने आपत्ति जताई, उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।
आरोप है कि यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया जिसमें नकली प्रमाणपत्र और फोटो चिपका कर छात्राओं को गुमराह किया गया। अभिभावकों का कहना है कि फीस जमा कराने के बावजूद न तो बच्चों को वैध दस्तावेज मिले और न ही परीक्षा की कोई व्यवस्था बनाई गई। संस्थान अचानक बंद होने से छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
डीएम से गुहार लगाने पहुंचीं छात्राएं
अमेठी। पीड़ित छात्राएं सलोनी, प्रिंशू, ज्ञानमती, कोमल, सूर्यकली और रूचि शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने डीएम संजय चौहान से कहा कि न तो उनकी फीस लौटाई गई और न ही पढ़ाई आगे बढ़ाने की कोई व्यवस्था बनी। छात्राओं ने आरोप लगाया कि जौनपुर, नोएडा और बरेली स्थित संस्थाओं की ओर से अब 40 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि पैसा दो तो फरवरी की परीक्षा में बैठा देंगे। छात्राओं ने डीएम से मांग की कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और फीस वापस कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो उनका एक साल बर्बाद हो जाएगा।