अमेठी सिटी। ठंड के मौसम में नींद न आना, चिड़चिड़ापन और थकान को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। छोटे दिन और कम रोशनी के कारण मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों से लोग अवसाद की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. वीर विक्रम सिंह ने बताया कि रासायनिक परिवर्तनों के कारण नींद न आने की समस्या बढ़ जाती है। सर्दी शुरू होने से पहले जिन गतिविधियों में आनंद आता था, उनमें रुचि कम होने लगती है। सामाजिक अलगाव और अस्वीकृति के प्रति संवेदनशीलता में भी बढ़ोतरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में मंगलवार को मरीजों की संख्या 200 पार कर गई थी, जबकि बुधवार को 150 मरीज आए। इनमें से प्रतिदिन चार से पांच मरीज इसी समस्या को लेकर परामर्श लेने पहुंच रहे हैं।
अवसाद के प्रमुख लक्षण
बताया कि अवसाद के रोगियों में अपराध बोध और निराशा की भावना देखी जाती है। इसके अन्य लक्षणों में अत्यधिक थकान, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी और स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी शामिल है। अवसाद के मरीजों में शारीरिक समस्याएं जैसे सिरदर्द भी होने लगती हैं। यह मरीज उपचार कराने के बाद मरीज सामान्यत ठीक हो जाते हैं।