शाहगढ़। पूरे दयाराम पांडेय पनियार में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन प्रवाचक जानकी महाराज ने रामायण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है।
प्रवाचक ने कहा कि रामायण के हर पात्र से मनुष्य को कुछ न कुछ सीख मिलती है। दूसरों की संपत्ति पर कभी अधिकार नहीं करना चाहिए और हर परिस्थिति में संयम व धैर्य बनाए रखना जरूरी है। जो व्यक्ति सुख-दुख में संतुलन बनाए रखता है, वही कठिन परिस्थितियों को पार कर अपने लक्ष्य तक पहुंचता है।
परिवार में एकता और प्रेम बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भाईचारा मजबूत हो तो बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आसान हो जाती है। सत्संग का महत्व बताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल देता है। जहां प्रभु का गुणगान होता है, वहीं उनका वास होता है। इस मौके पर राधेश्याम तिवारी, गजाधर प्रसाद, सतीश मिश्र, कंसराज सिंह, प्रखर पांडेय, राजीव लोचन तिवारी आदि मौजूद रहे।