मुसाफिरखाना (अमेठी)। कादूनाला वन क्षेत्र के किनारे बसे नेवादा और पलिया पूरब के भुशू का पुरवा गांव में बृहस्पतिवार सुबह खेत के किनारे एक घायल वनरोज मिला। ग्रामीणों के अनुसार वनरोज किसी जंगली जानवर के हमले में घायल हुआ था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की आशंका से ग्रामीण भयभीत हैं।
सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने इलाके में कांबिंग भी की लेकिन उसे तेंदुए की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं मिले। न ही जिस स्थान पर घायल वनरोज मिली थी, उसके आसपास कोई पग चिन्ह मिला। वन विभाग के लोगों का दावा है कि कुत्तों के हमले के कारण वनरोज की जान गई होगी।
ग्रामीण हिमांशु तिवारी ने बताया कि बुधवार रात लगभग दो बजे घर के पास जंगली जानवर के लड़ने जैसी आवाजें सुनाई दीं थी। सुबह पांच बजे बाहर निकलने पर खेत किनारे एक वनरोज गंभीर हालत में मिला। सूचना पर पहुंची वन क्षेत्राधिकारी ज्योतिर्मय शुक्ल की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और घायल वनरोज को उपचार के लिए ले गई, लेकिन उसकी मौत हो गई। ग्रामीण तेंदुए द्वारा हमला किए जाने की बात कह रहे हैं, जबकि वन विभाग इसे नकार रहा है। मंगलवार रात नेवादा के पूर्व प्रधान घनश्याम पांडेय ने भी डीएफओ को फोन कर इलाके में तेंदुआ देखे जाने की सूचना दी थी।
दो अगस्त को तेंदुए ने किया था हमला
दो अगस्त को बिरईपुर निवासी विजय उर्फ सोनू (28), भैदपुर के बलदेव (32) और छोटेलाल (50) को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। हमले के बाद उसी रात तेंदुआ मारा गया था। अभी ग्रामीण उस घटना से उबर भी नहीं पाए थे कि मंगलवार को फिर तेंदुए की दस्तक की सूचना से भय का माहौल हो गया है।
नहीं मिले तेंदुए के पगचिह्न
प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र ने बताया कि कांबिंग में तेंदुए के पद चिन्ह नहीं मिले। नीलगाय के घावों और घटनास्थल की जांच से स्पष्ट है कि हमला कुत्तों ने किया था। इलाके में तेंदुए की मौजूदगी नहीं है, फिर भी सुरक्षा के लिए टीम लगातार गश्त कर रही है।