अमेठी सिटी। रिश्वतखोरी को समाप्त करने के लिए प्रशासन भले ही सक्रिय है, लेकिन कर्मचारियों पर कोई असर नहीं दिख रहा है। रविवार को भूमि आवंटन करवाने के नाम पर पैसे की मांग करते हुए वायरल ऑडियो और दीवारों पर एक फोटो लगा पोस्टर जिस पर लिखा है मैं हूं तहसील का घूसखोर लेखपाल... प्रशासन की कोशिश को फ्लाप साबित कर रहा है। वायरल ऑडियो व पोस्टर मुसाफिरखाना तहसील से जुड़ा बताया जा रहा है। अमर उजाला वायरल ऑडियो व पोस्टर की पुष्टि नहीं करता है।
सोशल मीडिया पर रविवार को सुबह भूमि आवंटन के नाम पर पैसा मांगने का एक ऑडियो वायरल हुआ तो देर शाम दीवारों पर लगा एक पोस्टर भी वायरल हुआ। पोस्टर में एक फोटो लगी है जो लेखपाल की बताई जा रही है। पोस्टर पर लिखा है कि मैं हूं तहसील मुसाफिरखाना का घूसखोर लेखपाल। आगे नाम भी लिखा है। पोस्टर में यह भी लिखा है कि किसकी हिम्मत जो मुझ पर कार्रवाई करे।
इसके आगे भी एक नाम लिखा है। वायरल ऑडियो में एक ग्राम प्रधान ने लेखपाल से पूरे मामले में बात की तो लेखपाल ने कहा कि पैसा दे दो पट्टा करवा दूंगा। लेखपाल और ग्राम प्रधान के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑडियो व वायरल पोस्टर का वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है।
समाधान दिवस में हो चुकी शिकायत
मुसाफिरखाना तहसील के बदलगढ़ गांव निवासी समीर व राम आनंद ने ग्राम प्रधान दिनेश कुमार, तीमुननिशा व कैसर जहां के हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में दिवसाधिकारी को दिया। शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि लेखपाल ने कई गांव के ग्रामीणों से पट्टा दिलाने के नाम हजारों रुपये वसूले हैं। फिलहाल बताया जा रहा है कि लेखपाल के व्यवहार से आहत कई गांव के प्रधान आक्रोशित हैं और लेखपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
तहसीलदार राहुल सिंह ने बताया कि ऑडियो संग पोस्टर का वीडियो और शिकायती पत्र के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। टीम गठित कर जांच करवाई जा रही है। जांच के बाद पूरे मामले में कार्रवाई की जाएगी।