फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amethi News: माता-पिता को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप

Sun, 03 May 2026 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
विज्ञापन
 भेंटुआ के जीवधर गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
विज्ञापन
अमेठी सिटी। भेंटुआ के जीवधर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आए प्रवाचक राजेंद्र महाराज ने कहा कि हमें किसी की भी निंदा नहीं करनी चाहिए और सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने माता-पिता की महिमा को धरती पर साक्षात भगवान का स्वरूप बताया।
विज्ञापन



प्रवाचक ने कहा कि माता-पिता ही संसार में प्रत्यक्ष देवता हैं। इन्हें कष्ट पहुंचाना जीवन का सबसे बड़ा पाप है। मंदिर न जाएं तो चल जाएगा, कथा न सुनें तो क्षम्य है, भजन-कीर्तन न करें तो भी जीवन कट सकता है, लेकिन यदि आपने माता-पिता की सेवा नहीं की तो कुछ भी किया हुआ सफल नहीं माना जाएगा। जो संतान माता-पिता को पीड़ा देती है, वह जीवन में कभी वास्तविक सुख प्राप्त नहीं कर सकती।


उन्होंने इकलौते पुत्र वाले परिवारों के संदर्भ में कहा कि माता-पिता का उत्तरदायित्व तब और बढ़ जाता है, जब घर में एक ही बच्चा हो। ऐसे बच्चों के बिगड़ने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए संस्कारों की बुनियाद मजबूत करना आवश्यक है। प्रवाचक ने बताया कि शुकदेवजी ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त हुए। इस अवसर पर यजमान अवधेश नारायण पांडेय, रमाकांत, रामदुलारे, सुरेश और अशोक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें