अमेठी। सुख और दुख जीवन में एक सिक्के के ही दो पहलू हैं। कभी सुख आता है और कभी दुख। जिस प्रकार समय का पहिया हमेशा चलता रहता है, उसी प्रकार दुख और सुख भी आते और जाते रहते हैं। इन दोनों की भी एक अवधि होती है। परंतु मनुष्य के जीवन में जब कभी ज्ञान न होने की स्थिति आए तो मनुष्य को शास्त्रों से प्रेरणा लेनी चाहिए। ये बातें संग्रामपुर के ठेंगहा गाव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक राजीव नयन शरण महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने प्रभु नाम महिमा, अजामिल उपाख्यान, प्रह्लाद चरित्र, गजेन्द्र मोक्ष एवं समुद्र मंथन प्रसंग की कथा सुनाई। प्रवाचक ने कहा कि कलयुग में कथाओं के संचालन का अर्थ ही प्रभु की प्राप्ति एवं मनुष्य के जीवन को सही मार्ग दिखाना है। उन्होंने सही मायने में विपदा और संपदा की व्याख्या की।
उन्होंने बताया कि मनुष्य की असल विपदा भगवान को भूल जाना है और मनुष्य की असली संपदा भगवान को सुख और दुख में याद रखना है। इस दौरान यजमान रामसुंदर त्रिपाठी व उर्मिला देवी, जगदीश तिवारी, राम कृपाल तिवारी, गंगा प्रसाद तिवारी, नीलेश तिवारी, करुणेश मिश्र, अनुपम मिश्र, लल्लन तिवारी, आशुतोष मिश्र, जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी आदि मौजूद रहे।