अमेठी सिटी। गुलालपुर ड्रेन के उफान से सात ब्लॉक के 40 गांवों में 35 वर्षों से धान की पैदावार नहीं हो सकी है। किसान हर साल बड़ी उम्मीदों से फसल रोपते हैं, लेकिन ड्रेन का उफान उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देता है।
खेतों में जलभराव से परेशान किसान लगातार जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या दूर करने वाला कोई नहीं। ड्रेन की सफाई और चौड़ीकरण की मांग सरकारी फाइलों में दब जाती है, जिसका दंश सिर्फ और सिर्फ किसान भुगत रहे हैं।
गुलालपुर ड्रेन का फैलाव जामों से लेकर गौरीगंज, शाहगढ़, अमेठी, भेटुआ, संग्रामपुर और भादर ब्लॉक तक है। झील के किनारे बसे 40 गांवों के करीब दो हजार किसानों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। ये झील उनके लिए वरदान के बजाय अभिशाप बन गई है। किसान हर साल करीब 1200 बीघा में धान की रोपाई करते हैं, लेकिन बारिश होते ही झील का पानी खेतों में भर जाता है। जब तक खेतों से पानी निकलता है, तब तक फसल सड़ जाती है। किसान पिछले 35 वर्षों से अपनी आंखों के सामने फसल नष्ट होते देख रहे हैं।
किसानों की आवाज उठाने वाले खाखरदेई के नैमिष पांडेय ने बताया कि उनकी 32 बीघे फसल हर साल डूब जाती है। इससे धान की फसल तो खराब होती ही है, गेंहू की बोआई भी समय से नहीं हो पाती। महापुर गांव के किसान रामबहादुर ने बताया कि उसके पास जीविकोपार्जन के लिए केवल डेढ़ बीघे ही खेती है। ऐसे में हर साल फसल पानी में डूब जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।
लहुरी के अरुण कुमार ने बताया कि ड्रेन की सफाई को लेकर अफसर संजीदा नहीं हैं। किसान परेशान हैं, लेकिन उनकी कोई सुनता ही नहीं है। त्रिलोकपुर के राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि ड्रेन की चौड़ाई बढ़ जाए तो समस्या दूर हो जाए। (संवाद)