शाहगढ़ (अमेठी)। विकास खंड के किटियावां गांव में रविवार को बहू के आगमन की तैयारियों के बीच दूल्हे की चचेरी व मौसेरी बहन की मौत और पिता संग चार लोगों के घायल होेने की खबर पहुंची। यह खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
किटियावां गांव के हरिहर सिंह के पुत्र शुभम सिंह की वैवाहिक रस्म पूरी होने के बाद रविवार को परिजन बहू के आगमन की तैयारियाें में जुटे थे। मंगल गीतों संग महिलाएं बहू के स्वागत की तैयारियां कर रही थीं तो रिश्तेदार भी बरात से लौट कर घर पर इंतजार कर रहे थे। वैवाहिक रस्म पूरी होने के बाद दूल्हे के पिता हरिहर सिंह कार से अपनी भतीजी काव्या सिंह (15), धान्या सिंह, भतीजे किशन सिंह और प्रतापगढ़ के सांगीपुर थाना क्षेत्र के साढ़ू अनुज सिंह व उनकी पुत्री साक्षी सिंह संग लौट रहे थे।
रास्ते में रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर मालिन का पुरवा गांव के पास आगे जा रही बस को ओवरटेक करते हुए जायस से रायबरेली की तरफ जा रहे ट्रक की चपेट में कार आ गई। हादसे में काव्या सिंह (15) पुत्री भारत सिंह और प्रतापगढ़ जिले के सांगीपुर थाना क्षेत्र के लखारा गांव की रहने वाली साक्षी सिंह (15) पुत्री अनुज सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, किटियावां की रहने वाली धान्या सिंह (15) पुत्री स्व. दुर्गाबक्श सिंह, हरिहर सिंह (52), किशन सिंह (15) पुत्र दिलीप कुमार और सांगीपुर निवासी अनुज सिंह घायल हो गए।
दूल्हे की चचेरी व मौसेरी बहन की मौत व पिता सहित चार लोगों के घायल होने की सूचना गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। मंगल गीत के बजाए परिजनों की रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण दरवाजे पर एकत्र हो गए। ग्रामीण व रिश्तेदार परिजनों को सांत्वना देने की कोशिश में जुटे रहे। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद काव्या का शव गांव पहुंचा। साक्षी की मां कंचन सिंह बेटी की मौत व पति के घायल होने की सूचना पर बिलखते हुए रिश्तेदारों संग अपने पैतृक गांव रवाना हो गईं।
काव्या की मां बोलीं, भगवान यह क्या कर दिया
काव्या की मौत के बाद मां मीना सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ा भाई अंश इकलौती बहन को खोने से गमगीन है। पिता भारत सिंह की मानो दुनिया ही उजड़ गई। मां रोते हुए कहती है कि जयमाल के बाद वापस आने को कहा था, रिश्तेदार लौट भी आए, लेकिन बेटी नहीं आई, बेटी जब आई तो कफन में लिपटी है। भगवान यह क्या कर दिया। पूरे गांव में मातम का माहौल है। परिजनों के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकल रही है कि खुशियों पर किसकी नजर लग गई। परिवार के पुरुष घायलों के उपचार के लिए अस्पताल में हैं। सोमवार सुबह अंतिम संस्कार की तैयारियां करते हुए रिश्तेदार व ग्रामीण परिवार को इस मुसीबत की घड़ी में संभालने की कोशिश कर रहे हैं।