अमेठी के गायत्री शक्तिपीठ में यज्ञ करते गायत्री परिवार के लोग। स्रोत: गायत्री परिवार
अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में चल रही 40 दिवसीय गायत्री महापुरुश्चरण साधना के समापन पर पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। 24 लाख गायत्री महामंत्र के जप के बाद साधकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।
यज्ञाचार्य इंद्रदेव शर्मा ने कहा कि वेदों और धर्मग्रंथों में यज्ञ का विशेष महत्व बताया गया है। यज्ञ से मनुष्य के भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में उन्नति होती है। साधना, पाठ, पुरुश्चरण और जप में हवन का विशेष महत्व है। गायत्री उपासना में भी हवन का विधान है। पुरुश्चरण में किए गए जप के 10वें भाग में हवन करने की परंपरा है। इसी क्रम में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति कराई गई। यज्ञ में बड़ी संख्या में साधकों ने आहुतियां अर्पित कीं। प्रमुख रूप से सुभाष चंद्र द्विवेदी, रामजस मौर्य, भारती सिंह, अभिषेक गुप्ता और अशोक शर्मा समेत अन्य साधक मौजूद रहे।