सिंहपुर के महेशपुर में भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत- आयोजक
सिंहपुर (अमेठी)। क्षेत्र के महेशपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक देवी राजनंदिनी ने विश्राम दिवस की कथा सुनाते हुए कहा कि सच्चा प्रेम और निस्वार्थ भक्ति ईश्वर को प्रिय है।
प्रवाचक ने कहा कि सुदामा चरित्र की कथा मित्रता, भक्ति और सच्चे प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। सुदामा, भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के मित्र थे। समय के साथ श्रीकृष्ण द्वारिका के सम्राट बन गए, जबकि सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण रहे। सुदामा पत्नी के आग्रह पर बालसखा श्रीकृष्ण से सहायता मांगने द्वारिका पहुंचे। जब सुदामा अपने घर लौटे तो देखा कि उनका टूटी-फूटी झोपड़ी एक सुंदर महल में बदल चुकी थी और उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।
यह कथा इस बात की प्रतीक है कि सच्ची मित्रता और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। सुदामा चरित्र हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम और निस्वार्थ भक्ति ही ईश्वर को प्रिय होती है। इस इस दौरान मुख्य यजमान स्वामी दत्त मिश्र व फूलमती देवी, शिवम मिश्रा, कृष्ण कुमार मिश्रा, राजेश प्रसाद मिश्रा, कुलदीप मिश्रा, अविनाश मिश्रा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।