अमेठी सिटी। कलयुग में सच्चे मन से भगवान का नाम लेने मात्र से ही जीवन का उद्धार संभव है। यह बात संग्रामपुर के ठेंगहा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाते हुए प्रवाचक श्याम शंकर मिश्र ने कही।
प्रवाचक ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व समझाते हुए कहा कि यह मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करती है। जहां कथा होती है, वहां की भूमि पवित्र और वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने माखन चोरी, ग्वाल-बालों संग उनके खेल, गोपियों संग उनकी नटखटता का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि ईश्वर केवल प्रेम और श्रद्धा से प्राप्त होते हैं, तप-त्याग से नहीं। प्रवाचक ने बताया कि माखन चोरी केवल एक बाल लीला नहीं, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक संदेश है कि भगवान भक्तों के प्रेम के भूखे होते हैं। भगवान केवल प्रेम के बंधन में ही बंधते हैं। इस मौके पर शांति देवी, शिव कुमार मिश्र, विजय कुमार मिश्र, पवन मिश्र, कुशमेश मिश्र, विराट मिश्र, लालता प्रसाद मिश्र, मनोज मिश्र आदि मौजूद रहे।