सिंहपुर के अहोरवा भवानी कस्बे में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
सिंहपुर। अहोरवा भवानी कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को प्रवाचक मोहित कृष्ण ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अपार शक्ति विद्यमान रहती है। जीवन में किसी लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा आती है तो उसका प्रमुख कारण संकल्प की कमी होती है।
प्रवाचक ने कहा कि निष्कपट भाव और दृढ़ निश्चय रखने वाला साधक ईश्वर की कृपा प्राप्त करता है। मनुष्य के भीतर अभिमान का भाव उत्पन्न होते ही भगवान उससे दूर हो जाते हैं। विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण ही भक्ति का वास्तविक आधार है। कहा कि जब भक्त भगवान के दर्शन न होने पर विरह की अनुभूति करता है और सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, तब श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं तथा उसे अपने सान्निध्य का अनुभव कराते हैं।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। व्यक्ति को अपने आचरण में सरलता और सत्यनिष्ठा अपनानी चाहिए। भक्ति का मार्ग बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता से प्रशस्त होता है। इस अवसर पर कमलेश गुप्ता, त्रिवेणी सोनी, रीता सोनी, दलजीत सिंह, जयकांत श्रीवास्तव, विजय पांडेय, राजेंद्र शुक्ल, कुंवर बहादुर और ब्रजेश पाल आदि मौजूद रहे।