बाजारशुकुल। पन्ही गांव स्थित मां कामाख्या धाम परिसर में आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवाचक सुरेंद्र महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाने का संदेश दिया। कहा कि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है, जबकि भक्ति और विश्वास जीवन में स्थिरता और शांति प्रदान करते हैं।
प्रवाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि ये लीलाएं निष्कपटता, प्रेम और सरलता का मार्ग दिखाती हैं। कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में इन गुणों को अपनाकर सच्ची सफलता की ओर बढ़ना चाहिए। गोवर्धन पूजा प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब इंद्र के अहंकार से ब्रजवासी संकट में पड़े, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर उनकी रक्षा की।
यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ रहते हैं और अहंकार का अंत निश्चित होता है। उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का भी संदेश दिया। कहा कि गोवर्धन पूजा हमें पर्यावरण के महत्व को समझने और उसकी रक्षा करने की प्रेरणा देती है। कथा के दौरान मुख्य यजमान समर बहादुर सिंह, जय सिंह, राजन सिंह, पुजारी बाबादीन, रिंकू पांडेय आदि मौजूद रहे।