अमेठी सिटी। शहर के अंतू रोड पर संचालित अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस कॉलेज में एएनएम की पढ़ाई कर रहीं 36 छात्राओं ने बताया कि ढाई साल कक्षाएं चलने के बाद भी उन्हें परीक्षा से रोक दिया गया। लगभग 72 लाख रुपये वसूलने के बावजूद रजिस्ट्रेशन और प्रवेश पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए।
आरोप है कि संस्थान के संचालक प्रिंस उर्फ आजम खां और सहयोगी विवेक श्रीवास्तव ने मिलकर फर्जी रसीदें बनाईं। अन्य सहयोगियों में शैलेंद्र मौर्य, बृजेश, दिलीप बाजपेयी, रेहान खान, आलीशान और आयुष तिवारी के नाम भी छात्राओं ने बताए हैं। 12 छात्राओं का नामांकन ही नहीं हुआ और जिनका दाखिला बरेली, जौनपुर तथा नोएडा के कॉलेजों में दर्शाया गया, वहां जमा रकम का कोई हिसाब नहीं मिला।
रविवार को मामला खुलते ही छात्राएं अभिभावकों संग कोतवाली पहुंचीं। गुस्से में घेराव कर नारेबाजी की गई। कहना था कि बरेली केंद्र पर एडमिट कार्ड मिलने के बाद भी उन्हें परीक्षा से रोक दिया गया और 40-40 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे गए। विरोध करने पर संचालक ने धमकी दी। प्रदर्शन कर रहीं पूजा त्रिपाठी, अंजली, सलोनी, प्राची, सत्य भारती, रुचि, नेहा यादव, सीमा, कविता, प्रीति कोरी, शालिनी और कई अन्य ने कहा कि परिवारों ने कर्ज व उधारी से फीस भरी थी। अब पढ़ाई और मेहनत पर पानी फिर गया है।
दोपहर बाद एसडीएम आशीष सिंह, सीओ मनोज मिश्र और एएसपी शैलेंद्र सिंह कोतवाली पहुंचे। छात्राओं ने विस्तार से पूरी कहानी सुनाई। खुलासा हुआ कि संस्थान ने क्लासरूम और लैब दिखाकर पढ़ाई का झांसा दिया। एक बैच यहां से पास भी हुआ, लेकिन मौजूदा परीक्षा में पोल खुल गई। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि छात्राओं को परीक्षा दिलाई जाएगी और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
वर्ष 2018 से संचालित हो रही थी संस्था
अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। प्रारंभिक वर्षों में यहां डीफार्मा, जीएनएम और एएनएम की कक्षाएं संचालित होती थीं। अब केवल जीएनएम की कक्षाएं ही चल रही है। अब तक डीफार्मा और जीएनएम के तीन बैच निकल चुके हैं। एएनएम के चार बैच भी पास हो चुके हैं। मौजूदा समय में बरेली से पांच छात्राएं परीक्षा दे चुकी हैं, जबकि 11 अभी वाहन की बुकिंग का इंतजार कर रही हैं।
112 पर कॉल के बाद भी ढीली कार्रवाई
छात्राओं ने आपात नंबर पर फोन कर पुलिस को बुलाया। संचालक और स्टाफ को थाने लाया गया, मगर मुख्य जिम्मेदार को थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया।
तीन घंटे धूप में बैठीं छात्राएं
कोतवाली परिसर में छात्राएं तीन घंटे धूप में बैठी रहीं। संचालक को छोड़ने पर वे नाराज थीं। देर शाम प्रभारी निरीक्षक बाहर आए और समझाने के बाद धरना समाप्त हुआ।
अधिकारियों ने सुनी व्यथा
शाम को पीस कमेटी की बैठक के दौरान पहुंचे अधिकारियों को छात्राओं ने आपबीती बताई। पता चला कि संस्थान लंबे समय से संदिग्ध ढंग से चल रहा था। अब ठगी उजागर होने के बाद जिम्मेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ऋण और उधार में फंसे परिजन
छात्राओं के परिजनों ने बताया कि बेटियों की पढ़ाई के लिए उन्होंने हरसंभव प्रयास से धन जुटाया। किसी ने ऋण लिया, किसी ने जेवर गिरवी रखे। अब परीक्षा में रोक लगने से सभी परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
प्रशासनिक उदासीनता से चलता रहा फर्जीवाड़ा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि संस्थान वर्षों से कोचिंग सेंटर की तरह चल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने स्थिति की जांच नहीं की। अब जब मामला सामने आया तो पूरे तंत्र की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।