अमेठी। सितंबर 2023 में महिला मरीज की मौत के मामले की सुनवाई न्यायालय ने शुरू कर दी है। सुल्तानपुर सीजेएम ने आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल के सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग आफीसर) सहित तीन चिकित्सकों को समन जारी किया है। इस मामले की सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के रामशाहपुर निवासी दिव्या शुक्ला को 14 सितंबर 2023 को पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन थियेटर में बेहोशी का इंजेक्शन देने के दौरान तबीयत बिगड़ने पर दिव्या को लखनऊ ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई थी।
इसके बाद संजय गांधी अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। शव रखकर प्रदर्शन करने के बाद पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे की विवेचना के बाद मुंशीगंज पुलिस ने अस्पताल के सीओओ अवधेश शर्मा निवासी बी 29 न्यू शांतिनगर थाना जनकगंज ग्वालियर मध्य प्रदेश, डॉ. उजैर अब्दुल्लाह सिद्दीकी निवासी हनीफनगर प्यारे पट्टी रोग थाना कोतवाली नगर सुल्तानपुर, डॉ. मोहम्मद रजा निवासी दादूपुर सुल्तानपुर व डॉ. शुभम द्विवेदी निवासी विकास खंड गोमतीनगर लखनऊ के खिलाफ धारा 304 ए के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
पीड़ित पक्ष के करीबी और अधिवक्ता कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि न्यायालय ने इस मामले में आरोप पत्र के बाद सुनवाई शुरू करते हुए अस्पताल के सीओओ समेत चार को 20 अप्रैल को समन जारी करके तलब किया है। अस्पताल प्रशासन ने भी सम्मन मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सीएमओ की जांच में भी मिली थी कमी
- मरीज की मौत के मामले में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद, डिप्टी सीएमओ डाॅ. पीके उपाध्याय व जिला संयुक्त अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट डाॅ. अभय गोयल की टीम बनाकर जांच कराई थी। जांच में स्वास्थ्य अधिकारियों ने लापरवाही उजागर करते हुए रिपाेर्ट दी थी।
मरीज के प्री एनेस्थेटिस्ट से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिले थे। यह भी मिला था कि मरीज को 80 मिनट में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा मरीज का उपचार नहीं किया गया। हार्ट अटैक आने पर मरीज के इलाज में लापरवाही पाई गई थी। जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार, हार्ट अटैक आने के उपरांत लगभग 12 घंटे बाद 16 सितंबर 2023 को 01:50 बजे हायर सेन्टर मेदान्ता अस्पताल, लखनऊ के लिए रेफर किया गया।
चिकित्सालय में इस दौरान हार्ट अटैक के उपचार से संबंधित कोई कार्डियोलॉजिस्ट / एमडी मेडिसिन की व्यवस्था नहीं थी, परन्तु चिकित्सालय प्रशासन द्वारा मरीज की अत्यंत गम्भीर स्थिति के उपरांत रेफर करने में देरी की गई। स्वास्थ्य विभाग ने इस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल की सेवाओं पर रोक लगा दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर करीब 20 दिन बाद अस्पताल का संचालन बहाल हुआ था।
खूब हुई थी राजनीति
- महिला की मौत के मामले को लेकर खूब राजनीति हुई थी। इस मामले को लेकर भाजपा व कांग्रेस आमने सामने आ गए थे। यहां तक कि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक ने संज्ञान लेते हुए सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद पीलीभीत के भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अस्पताल खुलवाने को लेकर पत्र लिखा था। अब एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में छाया हुआ है।