बाजारशुकुल (अमेठी)। थाना क्षेत्र के संसारपुर गांव में मंगलवार को सुबह दबंगों ने लाठियों व धारदार हथियार से हमला कर पूर्व प्रधान को मरणासन्न कर दिया और गन्ने के खेत में फेंक कर भाग गए। घायल पूर्व प्रधान की ट्राॅमा सेंटर लखनऊ में मौत हो गई।
घटना के पीछे कारोबारी विवाद बताया जा रहा है। पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। परिजनों ने तहरीर दे दी है। एएसपी ने कहा कि केस दर्ज किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात है। बाजारशुकुल थाना क्षेत्र के संसारपुर गांव निवासी पूर्व प्रधान शिव नारायण सिंह (50) सुबह किसी काम से पड़ोस के गांव बहादुर का पुरवा गए थे। वहां से लौटते समय रास्ते में दूध डेयरी के पास कुछ दबंगों ने उन पर लाठियों व धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर पूर्व प्रधान को मरणासन्न हालत में गन्ने के खेत में फेंक कर भाग गए। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पूर्व प्रधान के परिजनों को दी।
मौके पर पहुंचे परिजनों ने घायल पूर्व प्रधान को सीएचसी बाजारशुकुल पहुंचाया, वहां से चिकित्सकों ने उन्हें ट्राॅमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। ट्राॅमा सेंटर में पूर्व प्रधान की मौत हो गई। यह खबर जब गांव में पहुंची तो कोहराम मच गया। घटना की खबर मिलने पर सीओ अतुल सिंह सहित कई थानों की पुलिस गांव पहुंची।
मृतक के बेटे विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में उनके पिता पर जानलेवा हमला हुआ था। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। एएसपी हरेंद्र प्रताप का कहना है कि जांच में पता चला है कि पूर्व प्रधान की दूध डेयरी है। पड़ोस में गांव के कुछ अन्य लोगों ने डेयरी खोल ली है। दोनों के बीच ग्राहकों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में घटना हुई है।
देर रात जब शव गांव पहुंचा तो परिजन व ग्रामीण आक्रोशित हो गए।
उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। वहां मौजूद पुलिस अफसरों ने लोगों को समझाकर शांत कराया। पूर्व प्रधान के रिश्तेेदार पुलिस अधिकारी त्रिभुवन सिंह ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वर्ष 2011 में बने थे ग्राम प्रधान
ग्रामीणों के अनुसार शिव नारायण सिंह का गांव में बोलबाला था। वर्ष 2011 में वह प्रधान चुने गए थे। लोगों में शिव नारायण सिंह की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि सीट आरक्षित होने के बाद वर्ष 2016 वह अपने एक करीबी रामचंद्र को जिताने में सफल रहे थे। लेकिन 2021 में हुए चुनाव में आरक्षित सीट पर इनके पक्ष की गीता चुनाव लड़ी थीं, लेकिन दूसरे पक्ष की अनीता चुनाव जीती थीं।
कहीं चुनावी रंजिश तो नहीं हमले का कारण
ग्रामीण पूरे मामले में कुछ बोलने से बचने रहे है। लेकिन चर्चा थी कि प्रधान प्रतिनिधि से उनकी अनबन चल रही है। पांच दिन पहले गांव के दो पक्षों के विवाद में एक पंचायत में प्रधान प्रतिनिधि व पूर्व प्रधान आमने-समाने हो गए थे। सूत्रों की मानें तो मामला थाने तक पहुंचा था, लेकिन दोनों पक्षों ने कोई तहरीर नहीं दी थी। जिस मामले का पंचायत में विवाद था, उसका निस्तारण पुलिस ने करवा दिया था।