जगदीशपुर (अमेठी)। पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने से तापमान एवं आर्द्रता में बढ़ोतरी हाे रही है। धान की फसल पर गर्मी का विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कई जगहों पर धान में रोग लगने की समस्या आ रही है। यदि इसी तरह मौसम आगे भी रहा तो धान में रोग का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।
कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ आरके आनंद ने बताया कि बारिश न होने से इस समय जिले के अधिकतर क्षेत्रों में तापमान एवं आर्द्रता दोनों ज्यादा है, जो कि फसल में रोगकारक जीवाणु एवं कवक के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। इसलिए यदि ऐसा ही मौसम रहा तो धान में रोग बढ़ने की संभावना प्रबल है। धान में झोंका (ब्लास्ट), जीवाणु झुलसा एवं धारीदार जीवाणु झुलसा का प्रकोप बढ़ रहा है।
जीवाणु झुलसा में पत्तियां नोंक अथवा किनारे से एकदम सूखने लगती है। सूखे हुए किनारे अनियमित एवं टेढ़े-मेढे हो जाते हैं। धारीदार जीवाणु झुलसा में पत्तियों पर नसों के बीच कत्थई रंग की लंबी लंबी धारियां बन जाती हैं। इन रोगों के उपचार के लिए खड़ी फसल में स्ट्रेप्टोसायिकलीन छह ग्राम तथा 350 -400 ग्राम कॉपरआक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत दवा को 200 से 250 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। यदि फसल में रोग के लक्षण दिखाई दें तो यूरिया की टापड्रेसिंग कदापि न करें।
रोग की उग्रता में धब्बे पत्तियों पर भी फैल जाते हैं। खेत में ज्यादा पानी रहने से बीमारी तेजी से फैलती हैं। इसके नियंत्रण के लिए रोग की प्रारंभिक अवस्था में प्रोपीकोनाजोल 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।