अमेठी। अमेठी के केजीबीवी में दूसरे के नाम की डिग्री लगाकर विज्ञान शिक्षिका के पद पर नौकरी हासिल करने वाली फर्जी अनामिका शुक्ला को अमेठी पुलिस ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसकी पहचान कन्नौज जिले के थाना विशुनगढ़ के गांव शारदामई निवासी रामधनी की पुत्री आरती ऊर्फ आकृति ऊर्फ अन्नू के रूप में हुई। पुलिस ने दोपहर बाद कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पिछले दिनों शासन स्तर पर शिक्षा विभाग में अनामिका शुक्ला के नाम से 25 जिलो में नौकरी करने का मामला उजागर होने पर हड़कंप मच गया था। जांच शुरू हुई तो पता चला कि असली अनामिका कहीं नौकरी ही नहीं कर रही है। सभी जिलों में अनामिका की डिग्री लगाकर अलग-अलग महिलाएं नौकरी कर रही हैं।
जिले के अमेठी ब्लॉक स्थित केजीबीवी में भी जिला मैनपुरी के थाना भोगांव के गांव हसनपुर निवासी सुभाष चंद्र शुक्ल की पुत्री अनामिका के नाम से 28 नवंबर वर्ष 2019 से एक महिला के नौकरी करने का प्रकरण सामने आया।
बीएसए विनोद कुमार मिश्र ने अनामिका को मूल अभिलेख के साथ उपस्थित होने को कहा तो उसने मोबाइल पर त्याग पत्र भेज दिया। इसके बाद बीएसए विनोद कुमार मिश्र के निर्देश पर डीसी बालिका शिक्षा प्रभाकर मिश्र ओर से छह जून को कोतवाली अमेठी में केस दर्ज कराया गया।
केस दर्ज होने के बाद एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने सीओ पीयूष कांत राय के जांच में मामले के खुलासे की जिम्मेदारी कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम प्रभारी विनोद यादव को सौंपी। अनामिका की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी टीम को मंगलवार भोर मुखबिर ने स्थानीय रोडवेज डिपो पर फर्जी अनामिका के मौजूद होने की सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे दबोच लिया।
बुधवार को मामले का खुलासा करते हुए एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने बताया कि मैनपुरी जिले के नगला निवासी पुष्पेंद्र ने आरती को नौकरी दिलाने के लिए उसके पिता से दो लाख रुपये मांगा था। दो लाख रुपये तत्काल नहीं दे पाने पर नौकरी लगने के बाद मिलने वाले मानदेय से आधी राशि दो लाख रुपये वसूल होने तक देने की बात तय हुई।
एसपी ने बताया कि पुष्पेंद्र को तीन दिन पूर्व लखनऊ एटीएस गिरफ्तार कर चुकी है। एसपी ने कहा कि नौकरी दिलाने की शर्तें तय होने के बाद पकड़ी गई आरती के मूल दस्तावेज पुष्पेंद्र ने अपने पास रखकर उसे अनामिका का दस्तावेज दिया था। यह भी कहा था कि किसी के सामने कभी भूल से भी अपना असली नाम नहीं लेना।