मुसाफिरखाना। भीखीपुर निवासी कबाड़ कारोबारी रमन कुमार उर्फ बबलू अग्रहरि के अपहरण और फिरौती प्रकरण में पांच दिन बाद भी पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। मुसाफिरखाना कस्बे से अयोध्या के चमनगंज तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर भी घटना की कड़ियां स्पष्ट नहीं हो सकीं।
जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति ने रेकी की थी, जबकि वारदात में पांच से सात लोग शामिल रहे। प्रकरण रंगदारी से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
व्यापारी ने जिन तीन व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई, जांच में उनकी संलिप्तता नहीं मिली। सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड से अपहरणकर्ता की पहचान हुई है। पुलिस टीम अयोध्या, सुल्तानपुर, वाराणसी और जौनपुर में दबिश दे रही है। सूत्रों के अनुसार पीड़ित अपहरणकर्ताओं को पहचानता है, फिर भी उसने उनके नाम उजागर नहीं किए।
घटना के बाद बयान बदलने से शुरुआती जांच प्रभावित हुई। कथित फिरौती सौंपने की प्रक्रिया भी संदेह पैदा कर रही है। इसी आधार पर पुलिस ने स्थानीय अपराधियों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया।
सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बस्ती व गोंडा तक बढ़ाया गया। अधिकारियों ने आधिकारिक जानकारी देने से परहेज किया है। क्षेत्र में चर्चा है कि प्राथमिकी में जताई गई आशंका से अलग तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी और धन बरामदगी के प्रयास में जुटी है।
सूत्रों का कहना है कि व्यापारी अपहरणकर्ताओं को जानता है, फिर भी प्राथमिकी में अन्य लोगों का नाम दर्ज कराया गया। यह प्रश्न बना हुआ है कि वास्तविक आरोपियों के नाम सामने क्यों नहीं आए। बयान बदलने से जांच प्रभावित हुई है।
सीओ अतुल कुमार सिंह ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। बदमाशों की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।