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धनाभाव में प्रभावित हो रहा गो आश्रय केंद्र का संचालन

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अमेठी। निराश्रित गोवंश को आश्रय देने के लिए संचालित मवैया रहमतगढ़ व सेवरा का गो आश्रय केंद्र अफसरों की लापरवाही का शिकार हो रहा है। मांग के बावजूद आश्रय केंद्र में संरक्षित गोवंशों के भरण-पोषण मद में छह माह से धनावंटन नहीं होने से ग्राम प्रधान को संचालन में परेशानी उठानी पड़ रही है।
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प्रधानों ने बैंक से कर्ज लेकर अब तक संचालन करने की बात कहते हुए धनावंटन नहीं होने पर संचालन बंद करने की चेतावनी दी है।
बाजार शुकुल विकासखंड की ग्राम पंचायत मवैया रहमतगढ़ व सेवरा में निराश्रित गोवंशों को संरक्षित करने के लिए ग्राम पंचायत से अस्थाई गो आश्रय केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
मवैया रहमतगढ़ में 151 तो सेवरा में 56 गोवंश संरक्षित किये गए हैं। गोवंश संरक्षण व भरण पोषण के साथ देखरेख के लिए केयरटेकर की तैनाती करते हुए शासन से आवंटित धन से ग्राम पंचायत आश्रय केंद्र का संचालन करती है। पिछले छह माह से दोनों गो आश्रय केंद्र अफसरों की उपेक्षा का शिकार हो गए हैं।
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आलम ये है कि भरण-पोषण मद में धनावंटन नहीं होने से आश्रय केंद्रों का संचालन ग्राम प्रधानों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। मवैया रहमतगढ़ की ग्राम प्रधान ललिता पाल व सेवरा की ग्राम प्रधान रेहाना बानो ने बताया कि डीएम अरुण कुमार के साथ ही पशुपालन विभाग को कई बार पत्र लिखकर भरण-पोषण मद में राशि दिलाने की गुहार लगाई गई है।
इसके बावजूद आज तक भरण-पोषण मद में धनावंटन नहीं किया गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि संरक्षित गोवंशों के लिए चारा-भूसा का प्रबंध करने को बैंक से ऋण लिया जा चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदार धनावंटन नहीं कर रहे हैं।
सीबीओ डॉ. रमेश चंद्र पाठक ने बताया कि गो आश्रय केंद्र को आवंटित राशि का उपभोग प्रमाणपत्र मिलने के बाद संबंधित ब्लॉक को धनावंटन किया जाता है। बाजार शुकुल को भी भरण-पोषण मद का धनावंटन किया जा चुका है।
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