अमेठी सिटी। जिले के गठन को 15 वर्ष बीत गया है, लेकिन शाहगढ़ ब्लॉक के 36 गांवों के लोगों को अभी भी जिला मुख्यालय से सीधे परिवहन सेवा नहीं मिल सकी है। करीब डेढ़ लाख से अधिक आबादी को निजी व डग्गामार वाहनों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
एक जुलाई 2010 को जिले के गठन के बाद भी परिवहन सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। जिला मुख्यालय से सुल्तानपुर और रायबरेली के लिए दिन में बसों का संचालन होता है, जबकि लखनऊ और प्रयागराज के लिए सुबह के समय केवल एक-एक बस उपलब्ध है। इसके विपरीत, मुख्यालय से सटे शाहगढ़ ब्लॉक के 36 गांव आज भी परिवहन निगम की बस सेवा से वंचित हैं। गौरीगंज-मुसाफिरखाना और अमेठी–मुसाफिरखाना मार्ग के किनारे अधिकांश गांव बसे होने के बावजूद इन मार्गों पर परिवहन निगम की कोई बस नहीं चलती।
ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीआरसी और जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए निजी या प्राइवेट वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। रामगंज बाजार से शाहगढ़ होते हुए भुसियावां मार्ग पर इंटर व डिग्री कॉलेज, ब्लॉक मुख्यालय और अस्पताल होने के बाद भी यहां सवारी वाहनों की आवाजाही सीमित है, जिससे सफर करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण रामकुमार पांडेय ने बताया कि परिवहन के साधन न होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
मोबीन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। मंगला प्रसाद गुप्ता के अनुसार साइकिल और बाइक से सफर करना मजबूरी है। करुणाकांत वर्मा ने बताया कि ई-रिक्शा से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन किराया अधिक पड़ता है।
जल्द होगा बसों का संचालन
एआरएम काशी प्रसाद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन निगम की बसों के संचालन की प्रक्रिया चल रही है। शासन से बसों की आपूर्ति मिलते ही मांग के अनुसार सेवाएं शुरू की जाएंगी।