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Amethi News: तेज हवा के साथ बूंदाबांदी, बेचैन हो उठे किसान

Mon, 28 Apr 2025 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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 राजाफत्तेपुर क्षेत्र में आई तेज आंधी से उड़ कर गिरा टीन शेड। संवाद।
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अमेठी सिटी। भीषण गर्मी के बीच रविवार को अचानक मौसम बदल गया। सुबह हवा के साथ छिटपुट बूंदाबांदी हुई। इससे खेतों में पड़े भूसे को कुछ नुकसान हुआ है। हालांकि, बूंदाबांदी का मड़ाई व कटाई पर कोई असर नहीं पहुंचा। बदले मौसम के कारण किसानों के साथ ही वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजकों की चिंता बढ़ गई है। कुछ जगहों पर पेड़ गिरने से आवागमन प्रभावित हुआ। हालांकि, बादलों की आवाजाही से तपिश कुछ कम हुई। इससे गर्मी से राहत मिली।
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गर्मी के बीच रविवार सुबह मौसम ने अचानक करवट बदली और हवा चलने के साथ कहीं-कहीं बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी व हवा चलती देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। इस समय जिले में करीब पांच फीसदी गेंहू की मड़ाई का कार्य शेष रह गया है। वहीं, मड़ाई के बाद ज्यादातर किसानों का भूसा खेत में पड़ा है। यही नहीं कंबाइन से कटे गेंहू की फसल के अवशेष से भूसा बनाना रह गया है। मौसम को देख रविवार को दिनभर किसान बकाया काम निपटाने में लगे रहे।


अमेठी, गौरीगंज, भेटुआ में हल्की बूंदाबांदी हुई। वहीं, संग्रामपुर आदि क्षेत्रों में तेज हवा के कारण खेतों में पड़े भूसे को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा जिले के अन्य ब्लॉकों में भी हवा तेज रही। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने आगामी 24 घंटे में हल्के बादल छाए रहने व हल्की बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। जिले में शनिवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 20.5 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा 3.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली।
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दिनभर चिंतित रहे वैवाहिक आयोजन कर रहे लोग
जिले में रविवार को कई वैवाहिक कार्यक्रमों के साथ अन्य आयोजन थे। सुबह मौसम का मिजाज बदला तो आयोजकों के होश उड़ गए। हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई तो लोग परेशान हो उठे। कार्यक्रम स्थल पर टेंट व अन्य तैयारियां कुछ देर के लिए रुक गईं। लोग बाहर पड़ा सामान समेटने में जुट गए। हालांकि दिन भर मौसम में बादलों की आवाजाही से चिंता बनी रही।




पांच फीसदी से कम बचा है कार्य
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि गेंहू की फसल की कटाई का कार्य तकरीबन पूरा हो गया है। सिर्फ पांच फीसदी से भी कम किसान ऐसे हैं जो मजदूर व अन्य कारणों से गेंहू की फसल निपटाने व भूसा बनवाने के लिए बचे हैं।
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