जामों (अमेठी)। जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना दुर्लभ है। इस सुअवसर का सदुपयोग करना चाहिए। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होने के साथ ही शांति व मुक्ति मिलती है। ये बातें शुक्रवार को जामों के पूरे दिनई मिश्र गांव में चल रही भागवत कथा के छठे दिन प्रवाचक विजय मोहन महाराज ने कहीं।
्र
्र
भगवान की रासलीला का वर्णन करते हुए प्रवाचक ने कहा कि रास तो जीव की शिव से मिलन की कथा है। कहा कि जब जीव में अभिमान आता है तो भगवान उनसे दूर हो जाते हैं, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं, उसे दर्शन देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणी के साथ संपन्न हुआ। कहा कि धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। इस मौके पर रामप्रताप मिश्र, अंजनी कुमार, चंद्र शेखर मिश्र, विश्वंभर मिश्र आदि मौजूद रहे।