शाहगढ़ (अमेठी)। सच्चे मन और भक्ति भाव से प्रभु की कृपा प्राप्त की जा सकती है। छल-कपट ही मानव के कष्ट सहन करने का मुख्य कारण है। लोगों को छल-कपट से दूर रहना चाहिए। मनुष्य को प्रभु की शरण में रहते हुए धर्म के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। ये बातें शुक्रवार को चिलबिली गांव में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन प्रवाचक जानकीदास महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने राम जन्म के प्रसंग की कथा विस्तार से सुनाई। भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी... की स्तुति के साथ शुरुआत की तो माहौल भक्तिमय हो गया। कहा कि राजा दशरथ के संतान न होने के कारण अपने कुलगुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं। जहां गुरु वशिष्ठ, श्रंगी श्रषि से शुभ पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाते हैं। यज्ञ कुंड से अग्नि देवता प्रकट होकर राजा दशरथ को खीर प्रदान करते हैं, जिसके बाद राजा दशरथ तीनों रानियों कौशल्या, कैकेई और सुमित्रा को खीर देते हैं। उस खीर के खाने से तीनों रानियों को भगवान राम सहित भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
प्रवाचक ने कहा कि राजा दशरथ की तरह जब बनेंगे, तभी राम जैसे पुत्र जन्म लेंगे। उन्होंने कहा कि अपने को संस्कारी बनाना होगा और पुत्रों को भगवान राम की कथा से प्रेरणा देनी होगी, तभी देश में संस्कारों को बचाया जा सकता है। कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन चरित्र सदियों तक चलता रहेगा। इस मौके पर आयोजक रंजीत शुक्ला, रोहित मिश्रा, राहुल मिश्र, संतोष सिंह, राम कुमार मिश्र, नंद किशोर यादव आदि मौजूद रहे।