भादर (अमेठी)। पीपरपुर थानाक्षेत्र से गुजरने वाले प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर स्थित दुर्गापुर चौराहे पर शुक्रवार देर रात तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी। दुर्घटना में ड्यूटी से वापस घर जा रहे बाइक सवार सीआरपीएफ के दरोगा की मौके पर ही मौत हो गई तो उनके साथ मौजूद एक अन्य घायल हो गया। दुर्घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को जिला अस्पताल सुल्तानपुर में भर्ती कराने के बाद जांच-पड़ताल में जुटी है। सीआरपीएफ दरोग की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
मॉडल थाना रामगंज क्षेत्र के भादर गांव के पटी लालशाह निवासी उमाशंकर सिंह तीन अक्तूबर 1985 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उमाशंकर की तैनाती त्रिसुंडी स्थित सीआरपीएफ कैंप में थी। शुक्रवार देर रात उमाशंकर पीपरपुर निवासी भगवान बक्स सिंह के साथ बाइक से घर जा रहे थे। रास्ते में अयोध्या-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित दुर्गापुर चौराहे पर पहुंचे ही थे कि सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
दुर्घटना में उमाशंकर व भगवान बख्श गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंचे लोगों ने दोनों को सीएचसी पहुंचाते हुए मामले की जानकारी पुलिस को दी। अस्पताल में चिकित्सकों ने उमाशंकर को मृत घोषित करते भगवान बख्स की हालात नाजुक देख सुल्तानपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। सूचना पहुंचे पुलिस कर्मियों ने सीआरपीएफ दरोगा का शव को कब्जे में लेते हुए घायल को अस्पताल पहुंचने के बाद मामले की जानकारी परिवारीजनों को दी।
सीआरपीएफ दरोगा के मौत की सूचना से परिवार में कोहराम मचा गया। सीआरपीएफ ग्रुप के साथी भी दरोगा के मौत की सूचना पर गमगीन हैं। थाना प्रभारी धीरेंद्र यादव ने ट्रक को कब्जे में लेने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि चालक की तलाश की जा रही है। जल्द ही चालक को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
गांव में पसरा मातमी सन्नाटा
भादर (अमेठी)। सीआरपीएफ दरोगा उमाशंकर के मौत से गांव व क्षेत्र में मातमी सन्नाटा छाया हुआ है। मृतक सीआरपीएफ दरोगा पत्नी चंदा सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। दरोगा के चार बच्चों में तीन पुत्र जिसमें बड़ा पुत्र जितेंद्र सिंह उर्फ सोनू एनसीआर दिल्ली में प्राइवेट जॉब करता है तो दूसरे पुत्र धर्मेंद्र सिंह उर्फ मोनू व रवींद्र सिंह उर्फ रवि 25 प्रयागराज में नौकरी के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बच्चों में सबसे बड़ी पुत्री आशा सिंह 36 और जितेंद्र सिंह की शादी हो गई है। मृतक दरोगा के माता पिता का स्वर्गवास सात वर्ष पहले हो गया था। पिता भी फौज में थे।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
सीआरपीएफ दरोगा की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पोस्टमॉर्टम के बाद शव पैतृक आवास पहुंचा तो कोहराम मच गया। हर कोई दरोगा का अंतिम दर्शन करने को बेताब था। गांव पहुंचे सीआरपीएफ कर्मियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वैदिक संस्कार पूरा होने के बाद दरोगा के शव का अंतिम संस्कार गांव स्थित बाग में किया गया। अंतिम संस्कार के पहले सीआरपीएफ कर्मियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया तो मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।